नई दिल्ली - नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में करीब दो घंटे तक अहम बैठक हुई। बैठक के बाद CJP ने दावा किया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को मुआवजा देने और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि संगठन ने साफ कर दिया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं होगा।
सरकार ने मांगा कल दोपहर तक का समय
बैठक में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने प्रतिनिधित्व किया। बैठक के बाद नड्डा ने बताया कि संगठन ने सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार के 5 सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मांगों पर आंतरिक चर्चा करेगी और कल दोपहर अगले दौर की बैठक में अपना पक्ष रखेगी।
'प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं'
CJP के प्रवक्ताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को मुआवजा देने और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सरकार सकारात्मक है, लेकिन संगठन की सबसे बड़ी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
20 जुलाई की कार्रवाई पर उठाए सवाल
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और RAF ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ क्रूरता की। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
'शिक्षा पर टिप्पणी करने का अधिकार किसे?'
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अभिनय सर ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य व्यवस्था ही चुनौतियों से जूझ रही है, तब शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करने से पहले सरकार को अपने विभागों की स्थिति भी देखनी चाहिए। उन्होंने एक बार फिर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने पूछा है कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद अब तक कौन-कौन से सुधार लागू किए गए हैं और जांच किस चरण में पहुंची है।