नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में मंगलवार सुबह दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हुए इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं तुरंत बंद होनी चाहिए और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हमले में एक भारतीय नाविक की मौत, 10 घायल
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले का शिकार बने दोनों व्यापारिक जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक मौजूद थे। इस घटना में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का विषय है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने, हिंसा रोकने और विवादों का समाधान बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से निकालने की अपील की है।मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और वैश्विक व्यापार किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होना चाहिए।
फारस की खाड़ी में फंसे 11 भारतीय जहाज
विदेश मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान स्थिति के कारण भारत से जुड़े 11 व्यापारिक जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ये जहाज सुरक्षा स्थिति सामान्य होने और होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले 24 घंटे के पांच बड़े घटनाक्रम
अमेरिका ने ईरान पर 5 घंटे तक की बमबारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगभग पांच घंटे तक ईरान के कई इलाकों में सैन्य कार्रवाई की। इस दौरान बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनार्क, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
. ट्रम्प ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क की घोषणा की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। इसके बदले वहां से गुजरने वाले प्रत्येक कार्गो जहाज पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। साथ ही ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों पर नई पाबंदियों की भी घोषणा की गई।
. ईरान का जवाब- सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रम्प के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध कराना हमेशा से ईरान की जिम्मेदारी रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के बदले भुगतान की बात समझी जा सकती है, लेकिन 20 प्रतिशत शुल्क अत्यधिक है और ईरान केवल उचित शुल्क लेने की बात करता है।
अमेरिका ने नौसैनिक ठिकानों को भी बनाया निशाना
CENTCOM ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास स्थित ईरान के सबमरीन और नौसैनिक मेंटेनेंस बेस पर सी-ड्रोन के जरिए हमला किया। इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की नौसैनिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया।
. रूस का विशेष कमांड विमान तेहरान पहुंचा
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रूस का विशेष कमांड एयरक्राफ्ट Tu-214PU तेहरान पहुंचने का दावा किया गया है। यह विमान युद्ध या परमाणु संकट जैसी आपात स्थितियों में राष्ट्रपति और सैन्य नेतृत्व के मोबाइल कमांड सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।