भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत प्रदर्शन के साथ की है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 तिमाही में देश की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8% रहने का अनुमान लगाया गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 6.9% की वृद्धि से काफी अधिक है। दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितता और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रहना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंकड़े संकेत देते हैं कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों और विभिन्न क्षेत्रों में मांग ने विकास की गति को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
वास्तविक GDP बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ पहुंची
स्थिर कीमतों के आधार वर्ष 2022-23 के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP ₹81.36 लाख करोड़ आंकी गई है। पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा ₹75.46 लाख करोड़ था। इस तरह वास्तविक GDP में 7.8% की वृद्धि दर्ज होने का अनुमान है। वहीं चालू कीमतों पर नॉमिनल GDP 10.3% की वृद्धि के साथ ₹88.27 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह ₹80.00 लाख करोड़ थी। वास्तविक GVA में भी 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई और यह ₹73.82 लाख करोड़ रही। नॉमिनल GVA 11.5% बढ़कर ₹80.53 लाख करोड़ तक पहुंची, जिससे अर्थव्यवस्था में व्यापक स्तर पर गतिविधियों की मजबूती का संकेत मिलता है।
सेवा क्षेत्र बना विकास की सबसे बड़ी ताकत
पहली तिमाही के दौरान सेवा क्षेत्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्थिर कीमतों पर टर्शियरी यानी सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 10.0% रहने का अनुमान है। वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं ने इस प्रदर्शन को विशेष मजबूती दी, इन गतिविधियों में 12.1% की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर सेकेंडरी क्षेत्र ने भी 8.6% की ठोस वृद्धि हासिल की है, जिसमें विनिर्माण गतिविधियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। विनिर्माण के आंकड़ों में इस बार डबल डिफलेशन पद्धति के इस्तेमाल से वास्तविक उत्पादन और मूल्य प्रभाव का आकलन अधिक सटीक तरीके से करने का प्रयास किया गया है।
कृषि क्षेत्र की रफ्तार रही अपेक्षाकृत धीमी
जहां सेवा और द्वितीयक क्षेत्र ने तेज वृद्धि दर्ज की, वहीं प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही। पहली तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र की स्थिर कीमतों पर वृद्धि दर 2.9% रहने का अनुमान है। इसमें कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की वृद्धि 3.6% रही। कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन ग्रामीण मांग, खाद्य कीमतों और किसानों की आय के लिहाज से अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए आने वाली तिमाहियों में इसके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। मानसून, फसल उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति आगे आर्थिक वृद्धि की व्यापक तस्वीर को प्रभावित कर सकती है। इसके बावजूद सेवा और औद्योगिक गतिविधियों में मजबूत प्रदर्शन ने समग्र विकास दर को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में मदद की है।
निवेश में डबल डिजिट वृद्धि ने बढ़ाया भरोसा
अर्थव्यवस्था के लिए सबसे सकारात्मक संकेतों में निवेश की तेज वृद्धि भी शामिल है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण यानी GFCF में स्थिर कीमतों पर 11.9% की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में इसकी वृद्धि दर केवल 5.8% थी। निवेश में यह तेजी बुनियादी ढांचे, उत्पादन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि निवेश की यह गति आगे भी बनी रहती है, तो इससे रोजगार सृजन और निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों को भी समर्थन मिल सकता है। मजबूत पूंजी निर्माण यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में भविष्य की मांग और उत्पादन क्षमता को लेकर निवेशकों तथा कंपनियों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
निजी खपत ने भी दिया अर्थव्यवस्था को सहारा
निवेश के साथ निजी उपभोग खर्च ने भी पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि को मजबूती दी है। निजी अंतिम उपभोग व्यय यानी PFCE में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 7.1% की वृद्धि दर्ज की गई। निजी खपत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा आधार है। उपभोक्ता खर्च में मजबूती का मतलब है कि अर्थव्यवस्था के भीतर मांग का आधार सक्रिय बना हुआ है। निवेश और निजी खपत का एक साथ मजबूत रहना विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। हालांकि आगे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, महंगाई, रोजगार और घरेलू मांग की स्थिति यह तय करेगी कि मौजूदा वृद्धि की रफ्तार कितनी टिकाऊ रहती है।
वित्त मंत्री ने भारत की जनता और सुधारों को दिया श्रेय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली तिमाही के प्रदर्शन को भारत के लोगों की कड़ी मेहनत और सरकार की आर्थिक नीतियों से जोड़ते हुए इसे सकारात्मक संकेत बताया है। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP में 7.8% वृद्धि का अनुमान है, जबकि नॉमिनल GDP में 10.3% और वास्तविक GVA में 8.2% वृद्धि दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए गए सुधार और अर्थव्यवस्था का प्रबंधन इस प्रदर्शन में योगदान दे रहे हैं। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस तेज वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखना होगी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यदि निवेश, निजी खपत, विनिर्माण और सेवाओं की मजबूती कायम रहती है, तो भारत की आर्थिक विकास यात्रा को आगे भी मजबूत आधार मिल सकता है।