नई दिल्ली: भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि परंपरा, बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी-विवाह से लेकर त्योहारों तक सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है। लेकिन साल 2026 में सोने की बढ़ती कीमतों ने इस परंपरागत बाजार की रफ्तार धीमी कर दी है। हालात ऐसे हैं कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सोना उपभोक्ता भारत में इस साल सोने की कुल मांग पिछले छह वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुमान के मुताबिक, 2026 में भारत की कुल सोने की मांग करीब 650 मीट्रिक टन रह सकती है।
छह साल में सबसे कम हो सकती है सोने की खपत
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारतीय परिचालन प्रमुख सचिन जैन ने रॉयटर्स को बताया कि साल के शुरुआती नौ महीनों में आभूषणों की मांग कमजोर रही है। इसका सीधा असर पूरे साल की कुल मांग पर पड़ने की आशंका है। अनुमानित 650 मीट्रिक टन की मांग साल 2020 के बाद सबसे कम होगी। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन और ज्वेलरी दुकानों के बंद रहने से भी सोने की खपत में भारी गिरावट आई थी।
सितंबर तिमाही में 29 फीसदी गिर गई सोने की मांग
सोने की मांग में गिरावट का असर सितंबर में समाप्त हुई तिमाही के आंकड़ों में भी दिखाई दिया। इस दौरान भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 मीट्रिक टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में मांग इससे काफी अधिक थी।
आंकड़ों के मुताबिक, आभूषणों की खरीदारी में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निवेश के लिए सोना खरीदने की मांग 40 फीसदी तक कम हो गई। इससे साफ है कि महंगी कीमतों ने केवल ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को ही नहीं, बल्कि सोने को निवेश का विकल्प मानने वाले लोगों को भी प्रभावित किया है।
रिकॉर्ड कीमतों ने बदला ग्राहकों का खरीदारी का तरीका
सोने की कीमतों में लगातार तेजी के कारण अब ग्राहकों को अपनी खरीदारी का बजट दोबारा तय करना पड़ रहा है। पहले जहां लोग शादी और त्योहारों के लिए भारी आभूषण खरीदने की योजना बनाते थे, वहीं अब कई ग्राहक कम वजन वाले गहनों और सीमित खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
महंगे सोने के कारण कुछ लोग खरीदारी टाल रहे हैं, तो कुछ पुराने गहनों को एक्सचेंज कर नए आभूषण खरीदने का विकल्प अपना रहे हैं। इस बदलाव का असर ज्वेलरी कारोबार पर भी पड़ रहा है।
ग्रामीण भारत में कमजोर मांग बनी बड़ी चुनौती
भारत में सोने की खपत का आधे से अधिक हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से आता है। गांवों में सोने के आभूषणों को पारंपरिक बचत और आर्थिक सुरक्षा के साधन के रूप में देखा जाता है। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति का सोने के बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, साल 2026 में एक दशक से भी अधिक समय की सबसे कमजोर मानसूनी बारिश ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है। इसका असर किसानों की आमदनी पर भी पड़ा है। जब खेती से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ता है, तो ग्रामीण परिवार गैर-जरूरी खर्चों और महंगी खरीदारी में कटौती करते हैं। सोने के आभूषणों की खरीदारी भी इससे प्रभावित होती है।
ईरान युद्ध के बाद बढ़ी महंगाई ने बढ़ाई मुश्किल
सोने की मांग कमजोर होने के पीछे केवल इसकी ऊंची कीमतें ही वजह नहीं हैं। ईरान युद्ध के बाद बढ़ती जीवन-यापन की लागत ने भी आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव डाला है। रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से लोगों के पास आभूषण और निवेश जैसी खरीदारी के लिए पहले जितनी अतिरिक्त रकम नहीं बच रही है। यही वजह है कि सोने की कीमतों में तेजी और महंगाई का दोहरा दबाव भारतीय बाजार में मांग को प्रभावित कर रहा है।
दिवाली और शादी के सीजन से बाजार को मिल सकती है राहत
हालांकि, साल की आखिरी तिमाही में सोने की मांग में कुछ सुधार की उम्मीद जताई गई है। भारत में दिवाली और शादी-विवाह का सीजन सोने की खरीदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। धनतेरस और अन्य शुभ अवसरों पर सोना खरीदने की परंपरा के चलते ज्वेलरी बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ सकती है। दिसंबर तिमाही में त्योहारों और शादी के सीजन के कारण खरीदारी को सहारा मिलने की संभावना है। हालांकि, ऊंची कीमतें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोरी इस सुधार की राह में बाधा बन सकती हैं।
सोने के आयात में भी आई गिरावट
भारत में सोने की मांग कम होने का असर इसके आयात पर भी पड़ा है। सितंबर तिमाही में देश का आधिकारिक सोना आयात घटा है। सचिन जैन के मुताबिक, इस साल सरकार की ओर से सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद अनौपचारिक माध्यमों से सोने की आवक बढ़ी है। इसका असर आधिकारिक आयात के आंकड़ों पर भी दिखाई दिया है।
क्या 2026 में बदल जाएगी सोने की खरीदारी की तस्वीर?
कुल मिलाकर, भारतीय सोना बाजार इस समय कई चुनौतियों से गुजर रहा है। एक तरफ ऊंची कीमतें ग्राहकों की खरीदारी क्षमता को प्रभावित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई ने ग्रामीण मांग को भी कमजोर किया है। हालांकि, दिवाली और शादी का सीजन बाजार को कुछ राहत दे सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतों का रुख और ग्राहकों की खरीदारी का मूड किस तरह बदलता है। फिलहाल वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का 650 मीट्रिक टन का अनुमान भारतीय सोना बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती का संकेत दे रहा है।