सिलीगुड़ी: दिवाली से पहले उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बड़ी घोषणा की है। बंद चाय बागानों से जुड़े श्रमिकों को आर्थिक सहायता देने के साथ ही राशन में भी अतिरिक्त चावल उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। मंगलवार को सिलीगुड़ी स्थित उत्तरकन्या में आयोजित प्रशासनिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य उन श्रमिक परिवारों को राहत देना है, जिनकी आजीविका चाय बागानों के बंद होने से प्रभावित हुई है।
चाय श्रमिकों को मिलेंगे 5 हजार रुपये और 50 किलो चावल
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बंद चाय बागानों के पात्र श्रमिकों को 5,000 रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें मिलने वाले चावल की मात्रा 35 किलो से बढ़ाकर 50 किलो की जाएगी। यानी मौजूदा 35 किलो के राशन के स्थान पर अब 50 किलो चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, आर्थिक सहायता की राशि श्रमिकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस व्यवस्था पर विचार कर रही है कि भविष्य में 50 किलो चावल नियमित मासिक राशन के रूप में दिया जा सके। हालांकि, इसके लिए योजना को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
21 बंद चाय बागानों को फिर से खोलने की तैयारी
उत्तर बंगाल में बंद पड़े चाय बागानों को दोबारा शुरू करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 21 चाय बागान बंद हैं। इन बागानों के बंद रहने से बड़ी संख्या में श्रमिक परिवारों के सामने रोजगार और आर्थिक संकट पैदा हुआ है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के श्रम मंत्री अर्जुन सिंह को बंद चाय बागानों को फिर से खोलने की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में केवल मुख्यमंत्री के स्तर पर काम नहीं हो सकता, बल्कि संबंधित विभाग को भी सक्रिय होकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
श्रमिकों को जॉब कार्ड तैयार रखने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने चाय बागान श्रमिकों से अपने जॉब कार्ड तैयार रखने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही काम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री चाय श्रमिक योजना के तहत सभी पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की बात भी कही। इससे पहले सरकार ने बंद चाय बागानों के श्रमिकों के लिए 5,000 रुपये की सहायता और अतिरिक्त राशन देने की घोषणा की थी। वहीं, चाय बागानों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 312 करोड़ रुपये की मंजूरी की जानकारी भी दी गई थी।
अब नियमित राशन को लेकर सरकार की अगली योजना पर नजर
दिवाली के मौके पर की गई इस घोषणा से बंद चाय बागानों से जुड़े श्रमिक परिवारों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की स्थायी व्यवस्था और बंद चाय बागानों को दोबारा चालू करना है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि 50 किलो चावल की व्यवस्था कब से नियमित मासिक राशन में लागू होती है और बंद पड़े 21 चाय बागानों को फिर से खोलने के लिए सरकार क्या समयसीमा तय करती है।