नई दिल्ली - भारत में आस्था, श्रद्धा और लोकपरंपरा से जुड़े प्रमुख त्योहारों में छठ महापर्व का विशेष स्थान है। सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत तथा खुशहाली की कामना करते हैं।
साल 2026 में छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर से होगी और इसका समापन 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। आइए जानते हैं छठ पूजा 2026 का पूरा कार्यक्रम और चारों दिनों का धार्मिक महत्व।
13 नवंबर को नहाय-खाय से होगी शुरुआत
छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 13 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती सुबह स्नान करके स्वच्छता और पवित्रता के साथ पूजा की तैयारियां शुरू करते हैं। घरों की साफ-सफाई की जाती है और सात्विक भोजन तैयार किया जाता है।
नहाय-खाय के दिन आमतौर पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल का सेवन किया जाता है। भोजन तैयार करने में विशेष शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। इसी दिन से छठ व्रत के कठिन नियमों और अनुशासन की शुरुआत हो जाती है।
14 नवंबर को खरना का व्रत
छठ पूजा का दूसरा दिन 14 नवंबर, शनिवार को खरना के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम के समय सूर्यास्त के बाद पूजा-अर्चना करके खरना का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर, रोटी और फल शामिल होते हैं। इसे पूरी श्रद्धा और शुद्धता के साथ तैयार किया जाता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती लगभग 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू करते हैं। इस दौरान पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता।
15 नवंबर को डूबते सूर्य को दिया जाएगा संध्या अर्घ्य
छठ महापर्व का तीसरा दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 15 नवंबर, रविवार को व्रती और परिवार के सदस्य नदी, तालाब, घाटों तथा अन्य जलाशयों के किनारे पहुंचकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे।
इस अवसर पर बांस की टोकरी और सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना तथा अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री सजाई जाती है। व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य देव की उपासना करते हैं और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। संध्या अर्घ्य के दौरान छठी मैया के पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
16 नवंबर को उगते सूर्य को दिया जाएगा उषा अर्घ्य
छठ महापर्व का चौथा और अंतिम दिन 16 नवंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु पूजा सामग्री लेकर घाटों पर पहुंच जाते हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके व्रती परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
उषा अर्घ्य के बाद छठी मैया की पूजा और आराधना की जाती है। इसके साथ ही व्रती अपना लगभग 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त करते हैं। इसे पारण कहा जाता है। पारण के साथ ही चार दिनों तक चलने वाला छठ महापर्व संपन्न हो जाता है।
छठ पूजा 2026 का पूरा शेड्यूल
- 13 नवंबर, शुक्रवार: नहाय-खाय
- 14 नवंबर, शनिवार: खरना
- 15 नवंबर, रविवार: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य की पूजा)
- 16 नवंबर, सोमवार: उषा अर्घ्य (उगते सूर्य की पूजा) और व्रत का पारण
क्यों खास है छठ महापर्व?
छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पर्व है। इसमें सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत मानकर उनकी आराधना की जाती है। वहीं छठी मैया की पूजा संतान की सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना से जुड़ी है।
इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी, पवित्रता और कठोर अनुशासन है। जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर लोग एक साथ घाटों पर पूजा करते हैं। यही वजह है कि छठ महापर्व भारतीय संस्कृति में आस्था, स्वच्छता, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकता का अनूठा प्रतीक माना जाता है।