नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी स्तंभ मजबूत हैं और उनमें कमजोरी के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। एचएसबीसी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने देशवासियों से भारत की आर्थिक प्रगति पर पूरे विश्वास के साथ अपनी बात रखने का आग्रह किया। वित्त मंत्री के अनुसार, देश की आर्थिक स्थिति को लेकर अनावश्यक संदेह जताने के बजाय उपलब्धियों और मजबूत आधारों को सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विकास क्षमता पर भरोसा रखते हुए वैश्विक मंचों पर भी आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखनी होगी।
जीएसटी संग्रह और बैंकिंग क्षेत्र का उल्लेख
सीतारमण ने अर्थव्यवस्था की मजबूती के प्रमाण के रूप में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में मजबूत वृद्धि और भारतीय बैंकों की बेहतर स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक समृद्धि के प्रमुख आधार सुचारु रूप से काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कर संग्रह में बढ़ोतरी और बैंकिंग व्यवस्था की मजबूती देश की आर्थिक सेहत के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। इन परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर निराधार आशंकाएं फैलाने के बजाय वास्तविक तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
आर्थिक चर्चा में संदेह के बजाय विश्वास जरूरी
वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक स्थिति पर बात रखने के तरीके में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने अफसोस जताया कि जानकार और समझदार लोग भी कई बार भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते समय संदेहपूर्ण रुख अपना लेते हैं। उनके अनुसार, देश की आर्थिक क्षमता को लेकर ऐसी झिझक उचित नहीं है। भारत को अपनी प्रगति, संस्थागत मजबूती और विकास की संभावनाओं को स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से भी आग्रह किया कि वे देश की आर्थिक यात्रा पर भरोसा जताने में संकोच न करें।
नकारात्मक सोच से बाहर निकलने की अपील
सीतारमण ने कहा कि भारत को सकारात्मक आर्थिक विमर्श की आवश्यकता है। देश की उपलब्धियों और संभावनाओं पर चर्चा करते समय नकारात्मकता को हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए यह बात खुलकर कहनी चाहिए कि देश आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके संबोधन का जोर इस बात पर रहा कि चुनौतियों के प्रति सजग रहते हुए भी देश की उपलब्धियों और संभावनाओं को कम करके नहीं आंकना चाहिए।
आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने रखे भारत की बात
वित्त मंत्री का संदेश केवल घरेलू आर्थिक चर्चा तक सीमित नहीं था। उन्होंने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर देश के भीतर और बाहर आत्मविश्वासपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, मजबूत आर्थिक आधारों और उपलब्धियों को तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करना जरूरी है। किसी भी देश की विकास यात्रा में नीतियों और संस्थाओं के साथ सकारात्मक राष्ट्रीय दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत को अपनी आर्थिक क्षमता का आकलन संदेह के बजाय ठोस संकेतकों के आधार पर करना चाहिए।
विकास की संभावनाओं पर भरोसे का संदेश
सीतारमण के संबोधन का सार यही रहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधारों को लेकर आशंकित होने की जरूरत नहीं है। जीएसटी संग्रह और बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने देशवासियों से आर्थिक प्रगति पर भरोसा बनाए रखने की अपील की। साथ ही, उन्होंने ऐसी सार्वजनिक चर्चा को प्रोत्साहित करने की बात कही, जिसमें तथ्यों के साथ देश की उपलब्धियों और संभावनाओं को भी उचित स्थान मिले। उनका आग्रह है कि भारत अपनी आर्थिक यात्रा को आत्मविश्वास और आशावादी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाए।