तमिलनाडु - दूध की कीमतों को लेकर देश के दो बड़े शहरों से अलग-अलग खबर सामने आई है। एक ओर तमिलनाडु सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को राहत देते हुए दूध की खरीद कीमत में बढ़ोतरी की है, तो दूसरी तरफ मुंबई में त्योहारी सीजन से पहले थोक दूध के दाम बढ़ने से डेयरी उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है। तमिलनाडु में सरकार के फैसले से लाखों पशुपालकों को फायदा होगा, जबकि मुंबई में बढ़ी लागत का बोझ कारोबारियों से होते हुए आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

तमिलनाडु में दूध खरीद कीमत 44 रुपये प्रति लीटर
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य विधानसभा में नियम 110 के तहत स्वत: संज्ञान लेते हुए दूध उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। सरकार ने दूध की खरीद कीमत में 6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस बदलाव के बाद दुग्ध उत्पादकों को दूध के लिए 44 रुपये प्रति लीटर की खरीद कीमत मिलेगी। सरकार का कहना है कि चारे, पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन से जुड़ी लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में खरीद मूल्य बढ़ाने का उद्देश्य पशुपालकों को आर्थिक सहारा देना और दुग्ध उत्पादन से जुड़े परिवारों की आमदनी को मजबूत करना है।

12 दिन में दूसरी बार बढ़ी खरीद कीमत
तमिलनाडु सरकार का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 12 दिनों के भीतर दूध खरीद कीमत में दूसरी बार वृद्धि की गई है। दोनों बढ़ोतरी को मिलाकर दुग्ध उत्पादकों के लिए खरीद मूल्य में कुल 6 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। सरकारी फैसले से राज्य के 3.16 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य बढ़ती उत्पादन लागत के बीच किसानों और पशुपालकों को बेहतर आर्थिक स्थिति उपलब्ध कराना है।
मुंबई में थोक दूध के दाम 9 रुपये बढ़े
वहीं मुंबई में आगामी त्योहारी मौसम से पहले दूध महंगा होने जा रहा है। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने थोक दूध की कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होंगी। इसके बाद मुंबई और आसपास के महानगरीय क्षेत्रों में थोक दूध की कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। संशोधित दरें अगले छह महीने यानी 28 फरवरी 2027 तक लागू रहने की बात कही गई है।
पनीर, दही और मिठाइयों पर पड़ सकता है असर
थोक दूध की कीमत बढ़ने का असर केवल दूध तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मुंबई में बड़ी संख्या में स्थानीय डेयरी कारोबारी, मिठाई की दुकानें, बेकरी और भोजनालय थोक दूध की खरीद पर निर्भर रहते हैं। दूध महंगा होने पर उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर दही, पनीर, मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। खासकर त्योहारी सीजन में जब दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की मांग बढ़ जाती है, तब कीमतों में यह बढ़ोतरी कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
एक तरफ उत्पादकों को राहत, दूसरी ओर उपभोक्ताओं पर दबाव
तमिलनाडु और मुंबई के फैसले दूध बाजार की दो अलग तस्वीरें सामने रखते हैं। तमिलनाडु में खरीद मूल्य बढ़ने से पशुपालकों की आय को सहारा देने की कोशिश की गई है, जबकि मुंबई में थोक दर बढ़ने से डेयरी कारोबार की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में दूध और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों पर नजर रहेगी। खासकर त्योहारी मांग बढ़ने के दौरान मुंबई के बाजार में इसका असर ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकता है।