नई दिल्ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 3-4 दिनों के दौरान पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम की यह सक्रियता बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। विभाग के अनुसार, स्थानीय स्तर पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं। सितंबर के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का स्वरूप असमान रहने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में कम अवधि के भीतर तेज बारिश के दौर बन रहे हैं। ऐसे में नदियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय चेतावनियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।
उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश के साथ बढ़ेगा मौसम का असर
पहाड़ी राज्यों में भी आने वाले दिनों में मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है। उत्तराखंड में 10 से 14 सितंबर के बीच कई स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है, जबकि हिमाचल प्रदेश में 13 और 14 सितंबर के आसपास बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश होने पर भूस्खलन, अचानक जलभराव और छोटे जलस्रोतों में तेज बहाव जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के देहरादून पूर्वानुमान में 10 से 14 सितंबर तक बादल छाए रहने और बारिश या गरज-चमक वाले दौर की संभावना जताई गई है। इसलिए पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों को स्थानीय प्रशासन और मौसम संबंधी चेतावनियों की जानकारी लेते रहना जरूरी होगा।
बिहार-झारखंड में भारी बारिश से बढ़ सकती है मुश्किल
बिहार और झारखंड में भी बारिश का एक नया दौर सक्रिय होने की संभावना है। उपलब्ध पूर्वानुमानों के अनुसार, बिहार में 10 से 13 सितंबर और झारखंड में 12 से 14 सितंबर के दौरान कई हिस्सों में बारिश हो सकती है। इन दोनों राज्यों में पहले से हुई भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में जमीन और जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। बिहार में हाल के दिनों में गंगा, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंता भी सामने आई है। ऐसे में नई बारिश होने पर निचले क्षेत्रों और नदी किनारे बसे इलाकों में परेशानी बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी फिर सक्रिय होगा मौसम
मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी बारिश के इस दौर से प्रभावित हो सकते हैं। मौसम विभाग के व्यापक पूर्वानुमान में मध्य प्रदेश सहित मध्य और पूर्वी हिस्सों में वर्षा गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत बताई गई है। सितंबर के शुरुआती दिनों में मध्य प्रदेश के आसपास बने स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र के कारण राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश के दौर देखे गए थे। अब पूर्वी और मध्य भारत में मौसम की नई सक्रियता के बीच स्थानीय स्तर पर तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। किसानों, नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए अचानक बढ़ने वाली बारिश विशेष सावधानी का विषय रहेगी।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में गरज-चमक के साथ बारिश
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और क्षेत्रीय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियों में तेजी आ सकती है। पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में हाल के दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया था, जबकि ओडिशा में भी बारिश के साथ तेज हवा और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। ऐसे मौसम में खुले क्षेत्रों, बिजली के खंभों, पेड़ों और कमजोर ढांचों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचना सुरक्षित रहेगा। समुद्र से जुड़े इलाकों में स्थानीय चेतावनियों के अनुसार गतिविधियां संचालित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
पूर्वोत्तर में भी कई दिनों तक बारिश की संभावना
पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का प्रभाव बना रहने के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। पर्वतीय और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन तथा अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी स्थानीय समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेष रूप से सड़क मार्गों पर यात्रा करने वालों को मौसम और स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनानी होगी। इस क्षेत्र में वर्षा का प्रभाव अक्सर जिले-दर-जिले अलग-अलग रहता है, इसलिए राज्यस्तरीय पूर्वानुमान के साथ स्थानीय चेतावनी को अधिक महत्व देना उपयोगी रहेगा।
दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल राहत, फिर लौट सकती है बारिश
दिल्ली-एनसीआर में बारिश की गतिविधि में फिलहाल कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन यह राहत लंबे समय तक कायम रहे, ऐसा जरूरी नहीं है। ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार राजधानी क्षेत्र में अगले कुछ दिनों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की स्थिति रह सकती है, जबकि उत्तर भारत के व्यापक क्षेत्र में 13 सितंबर तक कहीं-कहीं बारिश की संभावना बनी हुई है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों में मौसम की गतिविधि स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बदल सकती है। इसलिए राजधानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को फिलहाल राहत के बीच भी अचानक बदलने वाले मौसम पर नजर रखनी होगी।
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी मौसम रहेगा सक्रिय
महाराष्ट्र के विदर्भ और कोंकण क्षेत्र में भी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। मराठवाड़ा में भी कुछ दिनों के दौरान व्यापक वर्षा हो सकती है। पश्चिमी और मध्य भारत में मौसम की यह सक्रियता पूर्वी भारत में बन रहे वर्षा तंत्र के व्यापक प्रभाव तथा क्षेत्रीय मौसमी परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, इसे सीधे किसी नए चक्रवाती तूफान के रूप में देखना उचित नहीं होगा, क्योंकि उपलब्ध मौसम विभाग की ताजा सूचना मुख्य रूप से भारी बारिश और मौसमी प्रणालियों पर केंद्रित है। इसलिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात स्थानीय वर्षा चेतावनियों और संभावित तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहना है।