नई दिल्ली: देशभर में नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और प्रश्नपत्र लीक को लेकर छात्रों के लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता बहाल करने और जालसाजों पर नकेल कसने के लिए सरकार 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024] में बड़ा संशोधन करने जा रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष वीडियो संदेश के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार दोपहर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा कर इसे मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसके बाद संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत में, यानी आने वाले सोमवार को यह संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
कानून में क्या-क्या बड़े बदलाव संभव?
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, नए संशोधनों के तहत परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई और जल्द न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts)** के गठन का अनिवार्य प्रावधान जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, अपराध में शामिल लोगों की जेल की सजा और जुर्माने की राशि को और अधिक सख्त बनाने की योजना है।
मौजूदा कानून के तहत प्रावधान:
- व्यक्तिगत अपराध पर: दोषियों को 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
- सर्विस प्रोवाइडर (सेवा प्रदाता) की लापरवाही पर: परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या कंपनी द्वारा गड़बड़ी छिपाने या समय पर सूचना न देने पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है।
- संगठित गिरोह (ऑर्गेनाइज्ड क्राइम) के मामले में: मुख्य साजिशकर्ताओं और गिरोह को 5 से 10 साल की सजा और न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का नियम है।
- सूत्रों के अनुसार, नए संशोधन बिल में इन तीनों श्रेणियों में जेल की अवधि और वित्तीय दंड को और अधिक कठोर बनाया जाएगा।

'लाखों परीक्षार्थियों के लिए यह बेहद पीड़ादायक': पीएम मोदी
गुरुवार देर रात जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा:"यह कोई सामान्य घटना नहीं है। यह लाखों होनहार छात्रों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत दर्दनाक समय है। इसी वजह से बीते ढाई महीनों में सरकार ने इस दिशा में कई कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।"प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी बच्चे का एक साल बर्बाद न हो। लगभग 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित करने में सरकार ने अपनी पूरी ताकत लगा दी।उन्होंने बताया, "मैंने संबंधित विभागों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन पर काम करने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने देर रात तक मेहनत करके यह प्रस्ताव तैयार किया है। कैबिनेट में इस पर विस्तृत चर्चा कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और कोशिश होगी कि सोमवार को संसद में बिल लाकर इसे जल्द से जल्द पारित कराया जा सके
विपक्ष का तीखा हमला: राहुल गांधी ने फिर मांगा इस्तीफा
दूसरी ओर, परीक्षा धांधली के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश में 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी बड़े दोषी को सजा नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि केवल खोखले आश्वासनों या कानून में बदलाव से बात नहीं बनेगी। आंदोलनरत छात्र और देश की जनता अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है।शुक्रवार को होने वाले कैबिनेट फैसले और सोमवार को संसद में पेश होने वाले इस संशोधन विधेयक पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।