नई दिल्ली. देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले एनईईटी-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट ने कथित साजिश की विस्तृत तस्वीर सामने रखी है। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही परीक्षा निर्माण प्रक्रिया के दौरान बाहर पहुंच गया था और इसे कई स्तरों पर व्यवस्थित ढंग से विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया गया। चार्जशीट के अनुसार इस नेटवर्क में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े विषय विशेषज्ञ, निजी बिचौलिए, कोचिंग संचालक और विभिन्न राज्यों के स्थानीय संपर्क शामिल थे। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
चार्जशीट में परीक्षा निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार कथित साजिश की शुरुआत उस समय हुई जब परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की अत्यंत गोपनीय प्रक्रिया चल रही थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में शामिल कुछ विषय विशेषज्ञों ने अपनी आधिकारिक पहुंच का दुरुपयोग किया और प्रश्नों को याद रखने, नोट करने तथा बाद में पुनर्निर्मित करने का प्रयास किया। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि गोपनीय क्षेत्र में सुरक्षा जांच की कथित कमियों का लाभ उठाया गया। यदि ये आरोप न्यायालय में सिद्ध होते हैं तो यह देश की सबसे संवेदनशील परीक्षा प्रणालियों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर कमजोरी को उजागर करेगा।
कथित तौर पर प्रश्नों का पुनर्निर्माण कर बनाया गया लीक नेटवर्क
चार्जशीट के अनुसार संबंधित विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों के प्रश्नों को याद रखने, लिखने और संदर्भ सामग्री में चिन्हित करने जैसी तकनीकों का उपयोग किया। बाद में कथित रूप से इन जानकारियों को जोड़कर पूरे प्रश्नपत्र का पुनर्निर्माण किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इसके बाद यह सामग्री विभिन्न मध्यस्थों के माध्यम से आगे बढ़ाई गई। आरोप है कि प्रत्येक स्तर पर आर्थिक लाभ के लिए प्रश्नपत्र बेचा गया और इसके बदले बड़ी धनराशि तथा अन्य प्रकार की सुरक्षा भी ली गई। हालांकि इन सभी आरोपों की न्यायिक जांच अभी जारी है और अदालत में इनकी पुष्टि होना शेष है।
राजस्थान से केरल तक फैला कथित नेटवर्क
सीबीआई के अनुसार प्रश्नपत्र का प्रसार केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा। चार्जशीट में राजस्थान के सीकर और झुंझुनू जिलों को कथित वितरण केंद्रों के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां से कई अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि बाद में यह सामग्री डिजिटल माध्यमों से अन्य राज्यों, विशेषकर केरल तक भी पहुंची। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के कथित उपयोग का भी उल्लेख जांच दस्तावेजों में किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि आधुनिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर कथित नेटवर्क ने तेजी से जानकारी साझा की।
एक शिक्षक की सतर्कता से खुली कथित साजिश
जांच के अनुसार पूरे मामले का प्रारंभिक खुलासा राजस्थान के एक रसायन विज्ञान शिक्षक की सतर्कता से हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित प्रश्नपत्र और वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों में समानता देखकर संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच प्रारंभ हुई और बाद में मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दिया गया। जांच एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल का गठन किया और डिजिटल उपकरणों, वित्तीय लेन-देन तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत जांच आगे बढ़ाई। बाद में परीक्षा निरस्त कर पुनर्परीक्षा आयोजित की गई।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे बड़े प्रश्न
एनईईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार के पेपर लीक या परीक्षा में अनियमितता के आरोप केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रभाव डालते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्र निर्माण, सुरक्षित भंडारण, डिजिटल निगरानी, कर्मियों के सत्यापन और तकनीकी सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। साथ ही दोषियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई से ही अभ्यर्थियों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
अब अदालत में होगी आरोपों की कानूनी परीक्षा
सीबीआई ने इस मामले में कई आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण कानून और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। अब आगे की सुनवाई में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले का परीक्षण करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकदमा भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।