नई दिल्ली: नेशनल हाईवे पर सड़क हादसे के बाद घायलों तक एम्बुलेंस की मदद समय पर पहुंचाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नियमों को और सख्त कर दिया है। अब इमरजेंसी कॉल स्वीकार करने से लेकर एम्बुलेंस के मौके पर पहुंचने और घायल को अस्पताल तक ले जाने में हुई देरी पर संबंधित एजेंसी या ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाएगा।
NHAI ने एम्बुलेंस सेवाओं के लिए अलग-अलग चरणों में समय-सीमा तय की है। खास बात यह है कि कुछ मामलों में हर अतिरिक्त मिनट की देरी पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं निर्धारित समय में घायल को अस्पताल नहीं पहुंचाने, इमरजेंसी टिकट लेने से इनकार करने और एम्बुलेंस की तकनीकी निगरानी व्यवस्था में लापरवाही पर भी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
एक मिनट में इमरजेंसी कॉल स्वीकार करना जरूरी
NHAI के नए नियमों के मुताबिक हाईवे पर होने वाली किसी भी इमरजेंसी कॉल यानी टिकट को अधिकतम एक मिनट के भीतर स्वीकार करना होगा।अगर कॉल स्वीकार करने में निर्धारित समय से ज्यादा देरी होती है तो हर अतिरिक्त मिनट के लिए 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हादसे की सूचना मिलने के बाद एम्बुलेंस सेवा शुरू करने में अनावश्यक समय बर्बाद न हो।
कॉल मिलने के 2 मिनट में एम्बुलेंस को होना होगा रवाना
इमरजेंसी कॉल स्वीकार करने के बाद एम्बुलेंस को अधिकतम दो मिनट के अंदर बेस से रवाना होना होगा।इस समय-सीमा का उल्लंघन होने पर भी प्रत्येक अतिरिक्त मिनट की देरी के लिए 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यानी कॉल स्वीकार होने के बाद एम्बुलेंस के रवाना होने तक की प्रक्रिया पर भी निगरानी रखी जाएगी।
10 किलोमीटर के दायरे में 10 मिनट में पहुंचना होगा
नए नियमों में हादसे की जगह और एम्बुलेंस बेस के बीच की दूरी को भी ध्यान में रखा गया है।अगर हादसा एम्बुलेंस बेस से 10 किलोमीटर के भीतर हुआ है, तो एम्बुलेंस को अधिकतम 10 मिनट में मौके पर पहुंचना होगा। तय समय के बाद पहुंचने पर प्रत्येक घटना के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।वहीं यदि हादसे की दूरी 10 किलोमीटर से ज्यादा है तो घटनास्थल तक पहुंचने का निर्धारित समय दूरी के अनुसार बढ़ाया जाएगा।
घायल को एक घंटे में अस्पताल पहुंचाना जरूरी
NHAI के नियमों में सबसे अहम प्रावधान घायल को अस्पताल पहुंचाने की समय-सीमा से जुड़ा है। सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को एक घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी होगा।अगर इस प्रक्रिया में निर्धारित समय से अधिक देरी होती है तो संबंधित सेवा पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
GPS बंद या ऐप पर एम्बुलेंस ऑफलाइन मिली तो रोज 2,500 रुपये का दंड
NHAI ने एम्बुलेंस की डिजिटल निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सख्ती दिखाई है। एम्बुलेंस में GPS सिस्टम चालू रहना और उसकी लोकेशन संबंधित ऐप एवं डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहना जरूरी होगा।अगर GPS बंद पाया जाता है, एम्बुलेंस ऐप पर ऑनलाइन नहीं दिखाई देती या डैशबोर्ड पर उसकी जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तो प्रति दिन 2,500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर कंट्रोल रूम को तुरंत पता चल सके कि कौन सी एम्बुलेंस कहां मौजूद है और किस स्थान पर भेजी जा सकती है।
दवा या मेडिकल उपकरणों में कमी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना
एम्बुलेंस में मरीजों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए जरूरी दवाएं और मेडिकल उपकरण उपलब्ध होना भी अनिवार्य होगा।निरीक्षण के दौरान अगर दवाओं, मेडिकल उपकरणों, ड्राइवर या इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) से संबंधित कोई कमी पाई जाती है तो प्रत्येक निरीक्षण पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।इससे एम्बुलेंस को केवल परिवहन का साधन न मानकर आवश्यक आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं से लैस रखने पर जोर दिया गया है।
हर 24 घंटे में करना होगा ड्राई रन
NHAI ने एम्बुलेंस की सक्रियता और संचालन क्षमता बनाए रखने के लिए हर 24 घंटे में कम से कम एक ड्राई रन या मॉक ड्रिल करने का नियम भी तय किया है।इसके तहत एम्बुलेंस को कम से कम 5 किलोमीटर चलाना होगा। हालांकि, अगर उसी दिन एम्बुलेंस किसी सड़क हादसे या अन्य इमरजेंसी में गई है और उसका कुल आवागमन 5 किलोमीटर से अधिक रहा है, तो अलग से ड्राई रन की शर्त लागू नहीं होगी।
दूसरे हाईवे सेक्शन की एम्बुलेंस भी पहुंचेगी मौके पर
नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी किया गया है कि अगर हादसे वाले हाईवे सेक्शन में तत्काल कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो पड़ोसी हाईवे सेक्शन की एम्बुलेंस को भी घटनास्थल पर भेजा जा सकेगा।ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस को अपने निर्धारित क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर भी हादसे की जगह पहुंचना होगा। यानी किसी इमरजेंसी में ‘यह हमारा सेक्शन नहीं है’ कहकर जिम्मेदारी से बचने की गुंजाइश नहीं होगी।
CARE सिस्टम से होगी जुर्माने की गणना
NHAI ने जुर्माने की गणना और निगरानी के लिए CARE सिस्टम का इस्तेमाल करने की व्यवस्था की है।नियमों के तहत लगाए गए जुर्माने की राशि संबंधित एम्बुलेंस सेवा के मासिक भुगतान, EPC प्रोजेक्ट के तिमाही मेंटेनेंस भुगतान या HAM प्रोजेक्ट के छमाही भुगतान से काटी जाएगी।हालांकि, किसी एक महीने में संबंधित सेवा पर लगाया जाने वाला कुल जुर्माना 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होगा।
GPS और ऐप की लापरवाही पर NHAI की नजर
NHAI के मुताबिक GPS और CARE ऐप के इस्तेमाल में लापरवाही तथा एम्बुलेंस के ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसी स्थिति में हादसे के बाद सही समय पर एम्बुलेंस को ट्रैक करना और उसे घटनास्थल तक भेजना मुश्किल हो सकता है।
सड़क दुर्घटनाओं में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसी वजह से NHAI ने एम्बुलेंस की तकनीकी निगरानी और समयबद्ध संचालन दोनों को नियमों के दायरे में सख्ती से शामिल किया है।
सुप्रीम कोर्ट और CAG की चिंताओं के बाद सख्ती
NHAI के सर्कुलर में सड़क दुर्घटनाओं के बाद एम्बुलेंस की देरी के मुद्दे का भी उल्लेख किया गया है। यह विषय सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति और CAG के परफॉर्मेंस ऑडिट में भी उठाया जा चुका है।इसी पृष्ठभूमि में NHAI ने एम्बुलेंस सेवाओं के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने और नियमों का पालन नहीं होने पर आर्थिक दंड लगाने का फैसला किया है।