नई दिल्ली. त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रोजमर्रा की रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सब्जियों में शामिल प्याज की कीमतों में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान तेज वृद्धि हुई है। देश के कई हिस्सों में खुदरा बाजार में प्याज के भाव लगातार ऊपर जा रहे हैं और कुछ प्रमुख शहरों में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। ऐसे समय में जब त्योहारों के कारण घरों में खरीदारी और खानपान का खर्च सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाता है, प्याज की बढ़ती कीमतें परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकती हैं। बाजार में महंगाई का यह रुझान उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे दुकानदारों और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
एक महीने में 17% से ज्यादा बढ़ी कीमत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 21 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 40.79 रुपये प्रति किलोग्राम रही। इसके मुकाबले 21 जुलाई को औसत भाव लगभग 34.87 रुपये प्रति किलोग्राम था। यानी केवल एक महीने के भीतर प्याज की कीमत में करीब 17% की वृद्धि दर्ज की गई। यदि पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो स्थिति और अधिक स्पष्ट हो जाती है। 21 अगस्त 2025 को प्याज की औसत खुदरा कीमत लगभग 28.72 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस आधार पर एक साल में प्याज के दाम 42% से अधिक बढ़ चुके हैं, जिससे साफ है कि मौजूदा तेजी केवल कुछ दिनों की बाजार हलचल नहीं है।
बड़े शहरों में 50 से 60 रुपये किलो तक भाव
प्याज की बढ़ती कीमतों का असर महानगरों और बड़े शहरों के खुदरा बाजारों में अधिक दिखाई दे रहा है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्याज करीब 50 से 55 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है, जबकि मुंबई में इसका भाव लगभग 52 से 58 रुपये के बीच बताया जा रहा है। कोलकाता में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। चेन्नई में भी उपभोक्ताओं को करीब 48 से 54 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च करने पड़ रहे हैं। बेंगलुरु में भाव लगभग 45 से 52 रुपये और पटना में 48 से 55 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बताए जा रहे हैं। भुवनेश्वर में तो कुछ समय पहले 25 से 30 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 55 से 60 रुपये तक पहुंच गया है।
लासलगांव मंडी की तेजी ने बढ़ाई चिंता
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी को प्याज के प्रमुख थोक बाजारों में गिना जाता है और यहां कीमतों में होने वाला बदलाव देश के कई हिस्सों के बाजार पर असर डालता है। मौजूदा दौर में लासलगांव में भी थोक कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। पिछले एक सप्ताह में यहां प्याज के भाव में करीब 30% से 42% तक वृद्धि की बात सामने आई है। दूसरी ओर दिल्ली की आजादपुर मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज का थोक भाव भी 45 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच गया है। थोक बाजार में महंगा माल पहुंचने का सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ता है और परिवहन, भंडारण तथा व्यापारिक लागत जुड़ने के बाद उपभोक्ताओं को और अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
खरीफ फसल की आवक में देरी बनी बड़ा कारण
मौजूदा तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारणों में खरीफ प्याज की बुआई में देरी और नई फसल की आवक प्रभावित होना बताया जा रहा है। प्याज के बाजार में कीमतें काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती हैं कि मंडियों में नई फसल कितनी मात्रा में और कितनी तेजी से पहुंच रही है। यदि आवक कम रहती है तो उपलब्ध पुराने स्टॉक पर दबाव बढ़ जाता है और थोक बाजार में कीमतें ऊपर जाने लगती हैं। इस बार नई खरीफ फसल की समय पर आवक नहीं होने से आपूर्ति का संतुलन प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही त्योहारी मौसम से पहले मांग बढ़ने लगी है, जिससे सीमित आपूर्ति और बढ़ती मांग के बीच कीमतों में तेजी का दबाव और मजबूत हो गया है।
त्योहारी मांग ने बढ़ाया बाजार का दबाव
त्योहारों के नजदीक आते ही घरेलू खपत के साथ-साथ खाद्य कारोबार और होटल-रेस्तरां क्षेत्र में भी प्याज की मांग बढ़ती है। भारतीय भोजन में प्याज का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर होता है और कई व्यंजनों में यह प्रमुख सामग्री के रूप में शामिल रहता है। इसलिए त्योहारी मौसम में इसकी मांग में मामूली वृद्धि भी बाजार पर प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल जब नई फसल की आवक अपेक्षाकृत सीमित है, तब बढ़ी हुई मांग ने कीमतों को और ऊपर धकेला है। यदि आने वाले दिनों में मंडियों में आवक तेज नहीं हुई तो त्योहारी खरीदारी के दौरान खुदरा कीमतों पर दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है।
सरकारी बफर स्टॉक से राहत की उम्मीद
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। सितंबर से सरकारी भंडार का प्याज मंडियों और विभिन्न बाजारों में पहुंचाए जाने की उम्मीद है। सरकार के पास मौजूद बफर स्टॉक का उद्देश्य ऐसे समय में बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराना होता है, जब कीमतों में असामान्य तेजी दिखाई देती है। यदि पर्याप्त मात्रा में प्याज बाजार में उतारा जाता है तो थोक स्तर पर आपूर्ति का दबाव कम हो सकता है। इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने की संभावना है और इससे उपभोक्ताओं को आने वाले सप्ताहों में राहत मिल सकती है।
नई फसल की आवक पर टिकी बाजार की दिशा
अब प्याज की कीमतों की अगली दिशा मुख्य रूप से नई खरीफ फसल की आवक और सरकारी हस्तक्षेप की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी। यदि नई फसल समय पर और पर्याप्त मात्रा में मंडियों तक पहुंचती है तथा सरकार अपने बफर स्टॉक से बाजार की जरूरत के अनुरूप प्याज उपलब्ध कराती है, तो मौजूदा तेजी पर अंकुश लग सकता है। इसके विपरीत यदि आवक में और देरी होती है तथा त्योहारी मांग लगातार बढ़ती रहती है, तो खुदरा कीमतों पर दबाव कुछ और समय बना रह सकता है। फिलहाल प्याज की महंगाई ने त्योहारों से पहले आम परिवारों के रसोई बजट को जरूर प्रभावित किया है और आने वाले दिनों में बाजार की आपूर्ति स्थिति इस पूरे परिदृश्य की दिशा तय करेगी।