श्रीनगर: 2019 के बहुचर्चित पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े मामले में आरोपी इंशा जान उर्फ इंशा तारिक को अदालत से राहत नहीं मिली है। जम्मू की विशेष NIA अदालत ने इंशा जान की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
आतंकियों को घर में पनाह देने का आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का आरोप है कि इंशा जान और उनके पिता ने अपने घर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को पनाह दी थी। एजेंसी के मुताबिक, आतंकियों को ठहरने की जगह देने के साथ उन्हें भोजन और अन्य लॉजिस्टिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
कई आतंकियों के घर आने का दावा
NIA ने जांच के दौरान सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि मोहम्मद उमर फारूक और मोहम्मद कामरान अली समेत जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कई आतंकी इंशा जान के घर आते-जाते थे।
हथियारों के साथ ठहरने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, जनवरी 2019 में मोहम्मद उमर फारूक, आदिल अहमद डार और समीर अहमद डार हथियार और गोला-बारूद के साथ इंशा जान के घर में ठहरे थे। NIA ने इस दावे को मामले की जांच में अहम कड़ी बताया है।
आदिल डार का वीडियो भी इसी घर में रिकॉर्ड होने का दावा
NIA ने अदालत में दावा किया कि पुलवामा हमले के बाद सामने आया आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार का वीडियो 28 और 29 जनवरी 2019 को इंशा जान के घर में रिकॉर्ड किया गया था। एजेंसी ने इसे भी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों में शामिल किया है।
WhatsApp कॉल और मोबाइल से मिले डेटा का हवाला
जांच एजेंसी ने इंशा जान और मारे गए आतंकी मोहम्मद उमर फारूक के बीच हुई WhatsApp कॉल की जानकारी भी अदालत के सामने रखी। इसके अलावा उनके मोबाइल फोन से बरामद वॉयस नोट और तस्वीरों का भी NIA ने उल्लेख किया।
UAPA की धारा 43-D(5) का दिया हवाला
जमानत का विरोध करते हुए NIA ने कहा कि इंशा जान के खिलाफ उनके कथित आतंकी संपर्कों को लेकर पर्याप्त सामग्री मौजूद है। एजेंसी ने UAPA की धारा 43-D(5) का हवाला देते हुए जमानत पर कानूनी पाबंदियों की बात भी अदालत के सामने रखी।
बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य और लंबी हिरासत का दिया हवाला
वहीं, बचाव पक्ष ने इंशा जान की शारीरिक बीमारी और छह साल से अधिक समय से जेल में रहने को आधार बनाते हुए जमानत देने की मांग की। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों के बावजूद जमानत याचिका को स्वीकार नहीं किया।
पुलवामा हमले में शहीद हुए थे 40 से ज्यादा जवान
गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के लेथपोरा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था। इस हमले में 40 से अधिक CRPF जवान शहीद हुए थे। हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों पर सामने आई थी।
राष्ट्रीय हित को देखते हुए जमानत से इनकार
विशेष NIA अदालत ने मामले के आरोपों की गंभीरता, अपराध की प्रकृति और व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए इंशा जान की जमानत याचिका खारिज कर दी।
जेल प्रशासन को इलाज सुनिश्चित करने का आदेश
हालांकि, अदालत ने इंशा जान की स्वास्थ्य संबंधी दलीलों को ध्यान में रखते हुए बारामुल्ला जिला जेल के अधीक्षक को जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने हर 15 दिन में इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।