हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2026 की ज्येष्ठ अधिक मास की शिवरात्रि कई मायनों में विशेष रहने वाली है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो करीब 27 वर्षों बाद देखने को मिल रहा है। मान्यता है कि इस शुभ योग में भोलेनाथ और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं। खासकर विवाह में आ रही बाधाओं और वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है।
कब है अधिक मास की मासिक शिवरात्रि?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून 2026 को शाम 4:07 बजे शुरू होगी और 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 बजे समाप्त होगी। चूंकि मासिक शिवरात्रि की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए इस बार व्रत और पूजा 13 जून 2026, शनिवार को की जाएगी।
| विवरण | समय |
|---|---|
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 13 जून 2026, शाम 4:07 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 14 जून 2026, दोपहर 12:19 बजे |
| मासिक शिवरात्रि व्रत | 13 जून 2026, शनिवार |
| मुख्य पूजा का समय | प्रदोष काल |
27 साल बाद बन रहा है दुर्लभ गौरी योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ शिवरात्रि पर चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे। चंद्रमा और वृषभ राशि के इस विशेष संयोग से गौरी योग का निर्माण होगा। गौरी योग को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। माना जा रहा है कि लगभग 27 वर्षों के बाद ज्येष्ठ अधिक मास की शिवरात्रि पर यह दुर्लभ योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
किन लोगों के लिए शुभ रहेगा यह योग?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जा रहा है-
जिनके विवाह में देरी या बाधाएं आ रही हैं।
जिनके वैवाहिक जीवन में तनाव या मतभेद हैं।
जो सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली की कामना करते हैं।
जो भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।
मान्यता है कि गौरी योग में शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
ऐसे करें मासिक शिवरात्रि की पूजा
शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और फल अर्पित करें। वहीं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करें।
पूजन के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप, शिव चालीसा तथा शिव पुराण का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। IND24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।