सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस माह में पड़ने वाला हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन मास 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगा। इसी दौरान श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा।
हरियाली तीज 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, वर्ष 2026 में हरियाली तीज का व्रत और पर्व 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाया जाएगा।
हरियाली तीज 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे।
प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त: सुबह 7:29 बजे से 9:08 बजे तक
दोपहर पूजा मुहूर्त: दोपहर 12:25 बजे से शाम 5:22 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
हरियाली तीज पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ या हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान की साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें।
सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर व्रत का संकल्प लें।
एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान को फल, फूल, मिष्ठान, बेलपत्र और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ करें।
"ॐ नमः शिवाय" और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें।
अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें तथा प्रसाद का वितरण करें।
हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें शिवजी का वरदान प्राप्त हुआ। इसी कारण सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस दिन पूजा-अर्चना करती हैं।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से-
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है।
परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार तिथि एवं पूजा-विधि में अंतर संभव है।