नई दिल्ली - भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी को इस बार अगर आप घर पर पूजा-पाठ करने के साथ कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं, तो परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा का प्लान बनाया जा सकता है। देश के कई शहरों में जन्माष्टमी के दौरान मंदिरों की विशेष सजावट, भजन-कीर्तन, झांकियां और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर को सुबह 2:25 बजे शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहने की बात कही गई है। दिल्ली में निशिता पूजा का समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक बताया गया है। ऐसे में अगर आप त्योहार को किसी खास धार्मिक माहौल में मनाना चाहते हैं, तो इन जगहों को यात्रा के लिए चुन सकते हैं।

मथुरा-वृंदावन में महसूस करें कृष्ण जन्म की भक्ति
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा और वृंदावन का माहौल पूरी तरह कृष्णमय हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं, जबकि वृंदावन के मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यात्रा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि के साथ वृंदावन के प्रमुख मंदिरों के दर्शन किए जा सकते हैं। समय उपलब्ध हो तो गोकुल, गोवर्धन और बरसाना को भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। परिवार के साथ जन्माष्टमी का धार्मिक अनुभव लेने वालों के लिए यह सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है।

पुरी में धर्म के साथ समुद्र का आनंद
ओडिशा का पुरी भी जन्माष्टमी के दौरान घूमने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है। परिवार के साथ मंदिर दर्शन करने के बाद पुरी बीच और आसपास के पर्यटन स्थलों की सैर की जा सकती है। इस तरह धार्मिक यात्रा के साथ परिवार को घूमने-फिरने का भी मौका मिलेगा।

द्वारका में करें द्वारकाधीश के दर्शन
गुजरात की द्वारका नगरी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी प्रमुख धार्मिक स्थली है। जन्माष्टमी के दौरान द्वारकाधीश मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन और सजावट आकर्षण का केंद्र रहती है। मंदिर दर्शन के अलावा यात्री द्वारका के आसपास मौजूद धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी देख सकते हैं। समुद्र किनारे स्थित इस शहर में धार्मिक आस्था के साथ यात्रा का अलग अनुभव मिलता है।

मुंबई में देखें दही-हांडी का जोश
अगर आप जन्माष्टमी को पूजा के साथ उत्सव और मनोरंजन के रंग में देखना चाहते हैं, तो मुंबई का रुख किया जा सकता है। यहां दही-हांडी उत्सव जन्माष्टमी का प्रमुख आकर्षण रहता है। शहर के अलग-अलग इलाकों में गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर दही-हांडी फोड़ती हैं। हालांकि ऐसे आयोजनों में काफी भीड़ होती है, इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

गुरुवायुर में कृष्ण भक्ति का अलग रंग
केरल का गुरुवायुर भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। यहां स्थित गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है। परिवार के साथ मंदिर दर्शन के अलावा केरल की स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक भोजन और आसपास के पर्यटन स्थलों का आनंद भी लिया जा सकता है। दक्षिण भारत में जन्माष्टमी का अलग धार्मिक अनुभव लेने वालों के लिए यह खास विकल्प है।

ट्रिप प्लान करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
जन्माष्टमी के दौरान इन धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकती है। इसलिए यात्रा से पहले होटल, ट्रेन या फ्लाइट की बुकिंग कर लेना बेहतर रहेगा। मंदिरों में लंबी कतार और भीड़ को देखते हुए बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
मंदिरों के दर्शन, प्रवेश और पूजा से जुड़े नियमों की जानकारी भी यात्रा से पहले ले लेना चाहिए। अगर इस जन्माष्टमी आप पूजा के साथ परिवार के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव को यादगार बनाना चाहते हैं, तो मथुरा-वृंदावन, पुरी, द्वारका, मुंबई और गुरुवायुर आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।