भगवान भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस बार पंचांग के अनुसार 15 अप्रैल 2026 को ही व्रत रखा जाएगा, क्योंकि रात में चतुर्दशी तिथि का संयोग बन रहा है।
तिथि और समय
- वैशाख माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि
- प्रारंभ: 15 अप्रैल रात 10:31 बजे
- समापन: 16 अप्रैल रात 8:11 बजे
- निशिता काल के आधार पर आज व्रत और पूजा करना शुभ माना गया है।
शुभ मुहूर्त (निशिता काल)
- मासिक शिवरात्रि पर निशिता काल का विशेष महत्व होता है।
- मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 12:43 बजे तक
- अवधि: लगभग 44 मिनट
इस समय में पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
व्रत और पूजा विधि
- सुबह स्नान कर जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- निर्जला या फलाहार व्रत रखा जा सकता है।
- पूरे दिन संयम रखें, झूठ और विवाद से दूर रहें।
- पूजा के लिए फूल, बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत आदि सामग्री तैयार करें।
- शिवलिंग का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
- अंत में भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
व्रत का महत्व
मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।