खेल डेस्क : फुटबॉल के महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 (FIFA World Cup 2026) में इस बार ग्रुप स्टेज का रोमांच अपने चरम पर है। पहले जहां ग्रुप में टॉप दो स्थानों पर रहने वाली टीमें सीधे नॉकआउट में जाती थीं, वहीं इस बार 48 टीमों के नए मेगा फॉर्मेट ने इस पारंपरिक समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। अब 12 ग्रुप्स में से केवल टॉप दो ही नहीं, बल्कि तीसरे स्थान पर रहने वाली 8 'बेस्ट' टीमें भी राउंड ऑफ 32 (Round of 32) का टिकट हासिल करेंगी। यही वजह है कि ग्रुप स्टेज के आखिरी दौर में कई टीमों की किस्मत अब भी अधर में लटकी हुई है।
कैसे तय हो रहा है नॉकआउट का टिकट?
फीफा के नए नियमों के मुताबिक, तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए एक सख्त पैमाना तय किया गया है। टीमों को सबसे पहले उनके पॉइंट्स, फिर गोल डिफरेंस (Goal Difference), इसके बाद कुल किए गए गोल, फेयर प्ले रिकॉर्ड (अनुशासन) और अंत में फीफा रैंकिंग के आधार पर आंका जा रहा है। जब तक सभी 12 ग्रुप के मैच खत्म नहीं हो जाते, तब तक अंतिम तस्वीर साफ नहीं होगी।
4 अंक वाले सुरक्षित, इन तीन टीमों की जगह पक्की
अब तक के गणित के हिसाब से जिन टीमों के पास 4 अंक हैं, उनका नॉकआउट का टिकट लगभग पक्का हो चुका है। तीसरे स्थान पर रहकर भी 'राउंड ऑफ 32' में जगह पक्की करने वाली तीन टीमें इस प्रकार हैं:
इक्वाडोर: जर्मनी को आखिरी मैच में 2-1 से हराकर इस टीम ने 4 अंक और 0 गोल डिफरेंस के साथ क्वालिफाई किया। नॉकआउट में इनका सामना मेक्सिको से हो सकता है।
बोसनिया-हर्जेगोविना: 4 अंक और -1 गोल डिफरेंस के साथ इन्होंने भी अगले दौर में जगह बना ली है, जहां इनका सामना अमेरिका से हो सकता है।
स्वीडन: नीदरलैंड से 1-5 की करारी हार के बाद भी स्वीडन ने शानदार वापसी की और जापान से 1-1 का ड्रॉ खेलकर 4 अंकों (0 गोल डिफरेंस) के साथ आगे का सफर तय किया।
3 अंक वालों की अटकी सांसें, दक्षिण कोरिया की उम्मीदें बरकरार
सबसे दिलचस्प स्थिति दक्षिण कोरिया की है, जो 3 अंक और -1 गोल डिफरेंस के साथ तीसरे स्थान पर है। आखिरी मैच में दक्षिण अफ्रीका से 0-1 की हार के बाद स्टार खिलाड़ी सन ह्युंग-मिन (Son Heung-min) को पहले हाफ में बेंच पर रखने के कोच के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, गणना के मुताबिक उनके नॉकआउट में पहुंचने की संभावना अब भी 83% है।
वहीं क्रोएशिया (3 अंक, -1 गोल डिफरेंस), अल्जीरिया (3 अंक, -2 गोल डिफरेंस) और पराग्वे (3 अंक, -2 गोल डिफरेंस) को अभी अपने आखिरी मैच खेलने हैं, जिससे इनका भाग्य तय होगा। क्रोएशिया के पास अगले दौर में जाने का 91% मौका है।
आखिरी मैच में आर-पार की जंग
केप वर्डे (2 अंक) और बेल्जियम (2 अंक) जैसी टीमें अपने अंतिम मुकाबले के दम पर पासा पलटने की फिराक में हैं। बेल्जियम का न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच है, जिससे उनके आगे बढ़ने की उम्मीदें 90% तक बनी हुई हैं। इसके विपरीत, डीआर कांगो (1 अंक) और सेनेगल (0 अंक) के लिए राहें बेहद मुश्किल हो चुकी हैं।
क्यों इतना पेचीदा हुआ इस बार का वर्ल्ड कप?
इस नए ढांचे का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि 48 में से 36 टीमें अपने आखिरी ग्रुप मैच तक टूर्नामेंट में जीवित हैं। अब टीमों को केवल अपने मैच की जीत-हार नहीं देखनी पड़ रही, बल्कि वे दूसरी टीमों के गोल डिफरेंस पर भी नजरें टिकाए हुए हैं। यही कारण है कि दक्षिण कोरिया से लेकर स्कॉटलैंड तक के प्रशंसक टीवी स्क्रीन पर अपनी टीम के साथ-साथ दूसरे ग्रुप के लाइव स्कोरकार्ड भी खंगाल रहे हैं।