भारतीय तिरंगा देश की संप्रभुता, एकता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और दूसरे राष्ट्रीय अवसरों पर घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराना देशभक्ति की भावना को अभिव्यक्त करने का माध्यम बन गया है। लेकिन तिरंगा फहराने के साथ उसकी गरिमा और सम्मान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने भारतीय ध्वज संहिता में राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग, प्रदर्शन और रखरखाव से संबंधित प्रावधान किए हैं। गृह मंत्रालय समय-समय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इन नियमों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने की अपील भी करता है।
कार्यक्रम खत्म होने के बाद तिरंगे को यूं ही न छोड़ें
राष्ट्रीय या सांस्कृतिक आयोजनों में कागज से बने छोटे तिरंगों का इस्तेमाल आम तौर पर किया जाता है। खेल आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी लोग उत्साह के साथ राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचते हैं। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इन झंडों को सड़क, मैदान, कूड़ेदान या किसी अन्य स्थान पर फेंक देना तिरंगे के प्रति उचित सम्मान नहीं माना जाता। खास तौर पर कागज या अन्य सामग्री से बने झंडों को जमीन पर गिरने से बचाना चाहिए और उनका सम्मानपूर्वक निपटान किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग केवल उसे हाथ में लेकर चलने या फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यक्रम के बाद भी उसकी गरिमा बनाए रखना नागरिक कर्तव्य का हिस्सा है।
कटा-फटा या मैला तिरंगा फहराना उचित नहीं
भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को हमेशा सम्मानजनक स्थिति में रखा और प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इसलिए किसी घर, कार्यालय या संस्थान में ऐसा तिरंगा नहीं फहराया जाना चाहिए जो कटा-फटा, क्षतिग्रस्त या गंदा हो चुका हो। मौसम की वजह से ध्वज खराब हो गया हो या उसके कपड़े में गंभीर क्षति हो गई हो तो उसे नियमित रूप से फहराते रहना उचित नहीं है। ध्वज की गरिमा बनाए रखने के लिए उसे साफ-सुथरी और सम्मानजनक स्थिति में रखना आवश्यक है। राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता या बुना हुआ अथवा मशीन से निर्मित हो सकता है और निर्धारित प्रावधानों के तहत सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम और खादी जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक ही ध्वजदंड पर दूसरा झंडा लगाने से बचें
तिरंगे के प्रदर्शन को लेकर ध्वज संहिता में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। राष्ट्रीय ध्वज को किसी दूसरे झंडे के साथ एक ही ध्वजदंड पर फहराना उचित नहीं है। इसी तरह किसी अन्य झंडे को तिरंगे से ऊंचा, उसके ऊपर या उसके बराबर रखने की व्यवस्था नहीं की जानी चाहिए। इन नियमों का उद्देश्य किसी दूसरे प्रतीक या झंडे को राष्ट्रीय ध्वज के समकक्ष स्थान मिलने से रोकना है। इसलिए सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा निजी स्तर पर भी तिरंगा लगाते समय उसकी स्थिति और आसपास लगाए जाने वाले दूसरे झंडों का ध्यान रखना चाहिए।
अब आम नागरिक भी सम्मानपूर्वक फहरा सकता है तिरंगा
भारतीय ध्वज से जुड़े नियमों में समय के साथ बदलाव भी हुए हैं। 19 जुलाई 2022 के संशोधन के बाद आम नागरिक, निजी संस्थाएं और शिक्षण संस्थान किसी भी दिन या अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकते हैं। इसका उद्देश्य तिरंगे को केवल सरकारी कार्यालयों और राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित रखने के बजाय नागरिकों के दैनिक जीवन में राष्ट्रीय गौरव से जोड़ना था। हालांकि, इस सुविधा के साथ ध्वज की गरिमा और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यानी तिरंगा फहराने का अधिकार मिलने के साथ उसके सम्मान की जिम्मेदारी भी प्रत्येक नागरिक की है।
घर पर तिरंगा लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान
घर पर तिरंगा फहराते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह किसी ऐसी स्थिति में न पहुंचे जहां जमीन या पानी को छूने की संभावना हो। उसे गंदे, फटे या क्षतिग्रस्त रूप में नहीं रखना चाहिए। तेज हवा, बारिश या अन्य कारणों से तिरंगा खराब हो जाए तो उसे उसी स्थिति में फहराते रहने के बजाय सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखना चाहिए। इसी तरह तिरंगे का इस्तेमाल ऐसी सजावट या वस्तु के रूप में नहीं किया जाना चाहिए जिससे उसकी राष्ट्रीय गरिमा कम हो। देशभक्ति की भावना तभी सार्थक होती है जब उसके प्रतीक के प्रति व्यवहार भी उसी भावना के अनुरूप हो।
वाहनों पर तिरंगा लगाने के भी हैं निर्धारित नियम
राष्ट्रीय ध्वज को निजी वाहनों पर लगाने को लेकर भी आम लोगों में कई बार भ्रम रहता है। ध्वज संहिता में वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन के लिए विशेष प्रावधान हैं और हर निजी वाहन को अपनी इच्छा से तिरंगा लगाने की सामान्य अनुमति नहीं है। निर्धारित गणमान्य व्यक्तियों के वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने की व्यवस्था अलग है। इसलिए वाहन पर तिरंगा लगाने से पहले संबंधित नियमों को समझना जरूरी है। केवल देशभक्ति की भावना होना पर्याप्त नहीं है; राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग निर्धारित मर्यादाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।
तिरंगे का सम्मान केवल कानून नहीं, नागरिक संस्कार भी है
तिरंगे के सम्मान से जुड़े नियमों को केवल कानूनी प्रावधान के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, संविधान के मूल्यों और देश की सामूहिक पहचान का प्रतीक है। इसलिए इसके प्रति सम्मान किसी सरकारी आदेश की वजह से नहीं, बल्कि नागरिक संस्कार के रूप में विकसित होना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर घर-घर तिरंगा फहराना निश्चित रूप से गर्व और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करता है, लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि समारोह समाप्त होने के बाद कोई तिरंगा सड़क पर पड़ा न मिले। तिरंगे की ऊंचाई केवल उसके ध्वजदंड से नहीं, बल्कि उसके प्रति नागरिकों के सम्मान से तय होती है।