लखनऊ - संसद में FCRA बिल और शिक्षा-परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा समय में लाए जा रहे कई महत्वपूर्ण विधेयकों का असर अल्पसंख्यकों पर पड़ रहा है।
FCRA को लेकर अखिलेश का सवाल
अखिलेश यादव ने FCRA का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि इसके प्रावधानों के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि FCRA के तहत नियम बनाए जा सकते हैं तो दूसरे प्रकार के फंड और संस्थाओं के लिए भी समान नियम क्यों नहीं बनाए जाते।
शिक्षा और धार्मिक संस्थानों के मुद्दे पर चर्चा की मांग
सपा अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही शिक्षा-परीक्षा और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों पर संसद में चर्चा की मांग करती रही है। उनका आरोप है कि दोनों मामलों में एक जैसे लोगों या नेटवर्क की भूमिका होने के सवाल उठ रहे हैं, इसलिए दोनों विषयों पर एक साथ चर्चा जरूरी है। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि लखनऊ से सामने आई SIT रिपोर्ट में ऐसे लोगों के नाम होने की बात कही गई है, जिनके संबंध सरकार या भाजपा से बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब अलग हो सकता है।
डिंपल यादव ने सरकार पर साधा निशाना
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार के रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार सदन में आकर अपनी बात रखे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो। उन्होंने सरकार पर संवेदनशीलता और समझदारी की कमी का आरोप लगाया।
अमित शाह के बयान पर भी सपा का पलटवार
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी और जवाब देने के मुद्दे पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि विपक्ष लंबे समय से गृह मंत्री से सदन में जवाब देने की मांग कर रहा था।
वहीं, सपा सांसद राम गोपाल यादव ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सवाल पहले से दिए जाने के बाद ही जवाब देने की बात करना संसदीय प्रक्रिया के लिहाज से उचित तरीका नहीं है।
संसद में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
FCRA बिल, शिक्षा-परीक्षा से जुड़े विवाद और धार्मिक संस्थानों के मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। सपा का कहना है कि इन विषयों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, जबकि सरकार की ओर से संबंधित मुद्दों पर अपना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान इन मुद्दों पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।