लखनऊ। उत्तरप्रदेश के लोगों के लिए 14 जुलाई का दिन बड़ी सौगात लेकर आया। लंबे समय से प्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। उद्घाटन समारोह के दौरान नितिन गडकरी ने भविष्य की परिवहन व्यवस्था को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार अब "हवा में उड़ने वाली बस" जैसी आधुनिक परिवहन प्रणाली पर काम कर रही है, जिससे शहरों में आवागमन और भी तेज व सुगम बनाया जा सकेगा।
हवा में उड़ने वाली बस लाने की तैयारी
उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि देश में परिवहन क्षेत्र में लगातार नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही रोप-वे, केबल कार और वाटर एयरोड्रोम जैसी परियोजनाओं पर काम कर चुकी है। अब अगला लक्ष्य इलेक्ट्रिक आधारित मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करना है, जिसमें हवा में चलने वाली बस जैसी तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
पानी में उतरने वाला हवाई जहाज लाया था
गडकरी ने कहा कि उन्होंने पहले पानी पर उतरने वाले विमान की शुरुआत कराई थी और अब ऐसी आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिससे लोगों का सफर कम समय में पूरा हो सके। उनका कहना था कि भविष्य में शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने में यात्रियों को समय का अहसास भी नहीं होगा।
35 से 45 मिनट में पूरा होगा लखनऊ-कानपुर का सफर
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। अभी तक इस मार्ग पर ट्रैफिक और जाम के कारण लोगों को ढाई से तीन घंटे तक का समय लगता था। अब यही दूरी सिर्फ 35 से 45 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोगों, व्यापारियों और औद्योगिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
लगभग 4500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ एक्सप्रेसवे
63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे की आधारशिला वर्ष 2018 में रखी गई थी। इस परियोजना को करीब 4500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसे दो पैकेजों में विकसित किया।पहले पैकेज में लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र को जोड़ने वाला लगभग 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया, जबकि दूसरे पैकेज में लगभग 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर तैयार किया गया। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ के 11 गांवों और उन्नाव के 31 गांवों से होकर गुजरता है।
2022 में तेज हुआ निर्माण कार्य
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2022 में निर्माण कार्य ने तेजी पकड़ी। अक्टूबर 2025 तक ग्रीनफील्ड सेक्शन पूरी तरह तैयार हो चुका था। इसके बाद लखनऊ वाले एलिवेटेड हिस्से के गर्डर, रैंप और अन्य निर्माण कार्यों को अंतिम रूप दिया गया। वर्ष 2026 की शुरुआत तक परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो गया और जून 2026 में इसका सफल ट्रायल रन किया गया।
यातायात, व्यापार और उद्योग को मिलेगा लाभ
इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच आवागमन तेज होने के साथ-साथ व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी। यात्रा का समय कम होने से ईंधन की बचत होगी, परिवहन लागत घटेगी और दोनों शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी भी पहले से अधिक मजबूत होगी।
भविष्य की परिवहन व्यवस्था पर सरकार का फोकस
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दे रही है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रोप-वे, केबल कार और भविष्य में प्रस्तावित "हवा में उड़ने वाली बस" जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं। उनका उद्देश्य देश के बड़े शहरों में तेज, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं, नितिन गडकरी का "हवा में उड़ने वाली बस" वाला बयान भविष्य के परिवहन मॉडल को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता का विषय बन गया है।