उत्तर प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में कृषि का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है। लंबे समय तक धान, गेहूं और अन्य पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान अब ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनसे कम क्षेत्र में अधिक आय प्राप्त की जा सके। इसी क्रम में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसकी बढ़ती बाजार मांग, बेहतर कीमत और अपेक्षाकृत अधिक लाभ ने किसानों को नई संभावनाओं की ओर आकर्षित किया है।
राज्य सरकार भी बागवानी आधारित कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और खेती की बढ़ती लागत के दौर में उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलें किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन सकती हैं।
मीरजापुर में 35 हेक्टेयर का लक्ष्य, अनुदान में भी हुई बढ़ोतरी
उद्यान विभाग को इस वर्ष मीरजापुर जनपद में 35 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती विकसित करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि इस फसल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने अनुदान राशि बढ़ाकर प्रति हेक्टेयर 2 लाख 70 हजार रुपये कर दी है।
यह आर्थिक सहायता पौधरोपण, संरचना निर्माण और प्रारंभिक निवेश का बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान में मीरजापुर में लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में 362 किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र में फसल की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सहयोग मिलने से आने वाले वर्षों में इसका रकबा और तेजी से बढ़ सकता है।
कम समय में बेहतर उत्पादन और आकर्षक आय की संभावना
ड्रैगन फ्रूट को उच्च लाभ देने वाली बागवानी फसल माना जाता है। जिला उद्यान विभाग के अनुसार इसकी फल तुड़ाई मुख्य रूप से जून से दिसंबर के बीच होती है। एक एकड़ क्षेत्र से औसतन 45 से 55 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जो बाजार की मांग और उचित प्रबंधन के आधार पर किसानों को उल्लेखनीय आय उपलब्ध कराता है।
हालांकि प्रारंभिक वर्षों में इस फसल पर अपेक्षाकृत अधिक निवेश करना पड़ता है। एक एकड़ क्षेत्र में खेती विकसित करने पर लगभग साढ़े चार लाख रुपये तक की लागत आ सकती है। लेकिन तीसरे वर्ष से पौधे व्यावसायिक उत्पादन देने लगते हैं और प्रति एकड़ लगभग छह लाख रुपये तक वार्षिक आय की संभावना बताई जाती है। यही कारण है कि इसे दीर्घकालिक निवेश वाली लाभकारी फसल माना जा रहा है।
बाजार में बढ़ रही मांग, दूसरे जिलों तक पहुंच रही आपूर्ति
ड्रैगन फ्रूट की लोकप्रियता केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। मीरजापुर में उत्पादित फल बनारस, प्रयागराज, लखनऊ सहित कई बड़े शहरों में भेजे जा रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इस फल की मांग लगातार बढ़ रही है। एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, खनिज तत्व और रेशेयुक्त गुणों के कारण इसे पोषण से भरपूर फल माना जाता है।
क्षेत्र के कई किसान इस खेती में उल्लेखनीय सफलता भी प्राप्त कर चुके हैं। राजगढ़ क्षेत्र की किसान सुमन देवी को ड्रैगन फ्रूट उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। वहीं नुआव गांव के किसान आकाश दुबे जैसे युवा कृषक आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इस खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल रहे हैं। इससे अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल रही है।
वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन और गुणवत्ता
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती के लिए पौधों का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। वर्षा ऋतु में पौधों पर फूल आने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, इसलिए इस अवधि में पौधों की विशेष देखभाल करनी चाहिए। अत्यधिक धूप से तनों की सुरक्षा के लिए चूने के घोल का छिड़काव प्रभावी उपाय माना जाता है।
रातभर पानी में भिगोए गए चूने के घोल का छिड़काव करने से सूर्य की तीव्र किरणें परावर्तित हो जाती हैं, जिससे पौधों पर गर्मी का प्रभाव कम पड़ता है। साथ ही पौधों को कैल्शियम भी प्राप्त होता है, जो उनकी वृद्धि और मजबूती के लिए लाभदायक है। चूंकि फल सीधे तनों पर विकसित होते हैं, इसलिए स्वस्थ तने बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने में नई उम्मीद बन रही है ड्रैगन फ्रूट खेती
कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में ड्रैगन फ्रूट की खेती विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। सरकारी अनुदान, बढ़ती बाजार मांग, बेहतर लाभ और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय इस फसल को भविष्य की लाभकारी खेती के रूप में स्थापित कर रहा है।
यदि किसानों को प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, प्रसंस्करण सुविधाएं और विपणन का मजबूत नेटवर्क उपलब्ध कराया जाता है, तो यह फसल न केवल किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को गति दे सकती है, बल्कि विंध्य क्षेत्र को देश के प्रमुख ड्रैगन फ्रूट उत्पादक क्षेत्रों में भी शामिल कर सकती है।