कोलकाता: बीरभूम के सिउड़ी की 24 वर्षीय अमृता सिंह पिछले करीब छह महीने से लापता हैं। 13 मार्च 2026 की दोपहर करीब 1:30 बजे घर से निकलने के बाद से उनका परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला है। अमृता के पिता अर्धेंदु सिंह का कहना है कि बेटी घर से निकलते समय अपने शैक्षणिक दस्तावेज भी साथ ले गई थी। सिउड़ी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद परिवार ने स्थानीय पुलिस से लेकर जांच टीमों तक से संपर्क किया। पिता का दावा है कि पुलिस और CID की जांच के बावजूद बेटी का पता नहीं चल सका। इसके बाद वह अपनी बेटी की तस्वीर और संपर्क विवरण वाला पोस्टर सीने पर लटकाकर अलग-अलग जगहों पर उसकी तलाश करते रहे। अब उन्होंने मुख्यमंत्री के 'जनता दरबार' में पहुंचकर मामले में उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग की है।
नौकरी और भविष्य को लेकर तनाव में थी अमृता
परिवार के मुताबिक, अमृता ने दुर्गापुर के डॉ. बी. सी. रॉय कॉलेज से 2020-2024 बैच में फार्मेसी की पढ़ाई पूरी की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सिउड़ी स्थित अपने घर लौट आई थी। पिता के अनुसार, नौकरी नहीं मिलने और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण वह काफी तनाव में रहने लगी थी। अर्धेंदु सिंह का कहना है कि परिवार में माता-पिता दोनों की लंबे समय से बीमारी और इलाज का खर्च भी आर्थिक परेशानी का बड़ा कारण था। उनका दावा है कि इन परिस्थितियों का अमृता की मानसिक स्थिति पर असर पड़ा और वह काफी गुमसुम रहने लगी थी। हालांकि, अमृता के लापता होने के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। परिवार की ओर से मानसिक तनाव और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर जो बातें कही गई हैं, उन्हें पुलिस जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
13 मार्च को दस्तावेज लेकर निकली, फिर नहीं लौटी
परिजनों के अनुसार, 13 मार्च की दोपहर अमृता घर से निकली थीं। उनके पास अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र और कुछ जरूरी दस्तावेज थे। इसके बाद उनका परिवार से संपर्क नहीं हुआ। अमृता के परिवार ने उनकी तलाश रिश्तेदारों और परिचितों के अलावा संभावित स्थानों पर भी की। पिता का कहना है कि बेटी के बारे में कोई भी छोटी सूचना मिलने पर वह तुरंत वहां पहुंचते हैं, लेकिन कई बार उम्मीद जगने के बाद भी उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
बेटी का पोस्टर सीने पर लटकाकर सड़कों पर घूमे पिता
बेटी की तलाश में अर्धेंदु सिंह ने एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने अमृता की तस्वीर, हुलिया और संपर्क नंबर वाला पोस्टर अपनी छाती और पीठ पर लटका लिया और सड़कों पर लोगों से बेटी के बारे में जानकारी देने की अपील करने लगे। परिवार के मुताबिक, अमृता की लंबाई करीब 5 फीट है, रंग गोरा है और उसके बाल बॉब कट हैं। पिता का कहना है कि उन्होंने बीरभूम के अलावा दूसरे इलाकों में भी बेटी की तस्वीर दिखाकर उसकी तलाश की।

तारापीठ से मायापुर तक बेटी को खोजते रहे
परिवार का कहना है कि अमृता की धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों में भी रुचि थी। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए पिता ने तारापीठ, मल्लारपुर और मायापुर जैसे स्थानों पर भी बेटी की तलाश की। अर्धेंदु सिंह का कहना है कि वह मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर लोगों को बेटी की तस्वीर दिखाते रहे। उन्हें उम्मीद थी कि संभव है अमृता किसी आध्यात्मिक स्थल पर पहुंची हो और वहां किसी ने उसे देखा हो।
सॉल्टलेक में सूचना मिलने पर दौड़े पिता, लेकिन उम्मीद टूटी
परिवार के मुताबिक, कुछ समय पहले सॉल्टलेक के विधाननगर इलाके में एक युवती को देखकर कुछ लोगों को अमृता होने का संदेह हुआ। इसकी सूचना मिलने के बाद पिता तुरंत वहां पहुंचे। हालांकि, बाद में पता चला कि वह अमृता नहीं थीं। बेटी को सामने पाने की उम्मीद लेकर पहुंचे पिता को एक बार फिर निराश होकर लौटना पड़ा।
CCTV में बस से जाने का सुराग, लेकिन आगे की कड़ी नहीं मिली
परिवार के अनुसार, जांच के दौरान CCTV फुटेज से अमृता के सिउड़ी से बस के जरिए मल्लारपुर की ओर जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद संभावित रूट और आसपास के इलाकों में भी उनकी तलाश की गई। परिवार का दावा है कि तकनीकी जांच में भी अब तक कोई निर्णायक सुराग नहीं मिला। पिता के अनुसार, अमृता के आधार कार्ड से कोई नया मोबाइल सिम जारी नहीं हुआ, जिसके कारण मोबाइल आधारित तलाश में भी मुश्किलें आईं। हालांकि, इस मामले में पुलिस की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष और तकनीकी साक्ष्यों की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।
पुलिस और CID की जांच के बावजूद नहीं मिला सुराग
परिवार के मुताबिक, सिउड़ी पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ाई गई। जिला पुलिस की विशेष टीम और CID स्तर पर भी मामले की पड़ताल किए जाने की बात परिवार की ओर से कही गई है। अब परिवार चाहता है कि मामले में उपलब्ध CCTV फुटेज, बस रूट, संभावित यात्रा मार्ग और अन्य तकनीकी सुरागों की दोबारा गहनता से जांच की जाए, ताकि अमृता तक पहुंचा जा सके।
अब मुख्यमंत्री के जनता दरबार से उम्मीद
लगातार छह महीने तक बेटी का पता नहीं चलने के बाद अर्धेंदु सिंह मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचे। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर तमाम कोशिशों के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है और अब वह राज्य सरकार के शीर्ष स्तर से हस्तक्षेप चाहते हैं। पिता ने मुख्यमंत्री से पुलिस और जांच एजेंसियों को मामले में तेजी लाने का निर्देश देने की अपील की है। उनका कहना है कि उन्हें अब भी विश्वास है कि उनकी बेटी सुरक्षित है और व्यापक स्तर पर तलाश अभियान चलाकर उसे खोजा जा सकता है। परिवार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य स्तर पर विशेष जांच और जरूरत पड़ने पर अंतरराज्यीय स्तर पर भी तलाश अभियान चलाने की मांग की है। छह महीने से जारी यह इंतजार अब परिवार के लिए चिंता और उम्मीद—दोनों का कारण बना हुआ है।