कोलकाता: राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का आंदोलन अब राजधानी दिल्ली की सीमाओं को लांघकर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सड़कों तक पहुंच गया है। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली, सोनम वांगचुक के अनशन आंदोलन के समर्थन और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुक्रवार को कोलकाता में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया।
पुलिस अनुमति न मिलने पर बदला गया प्लान
शुरुआती योजना के अनुसार, कोलकाता सीजेपी द्वारा शुक्रवार दोपहर 4 बजे कॉलेज स्क्वायर से रानी रासमणि एवेन्यू तक एक अलग विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया गया था। हालांकि, कोलकाता पुलिस की ओर से इस कार्यक्रम को हरी झंडी नहीं मिली। इसके बाद प्रशासनिक जटिलताओं और शहर में भारी ट्रैफिक की आशंका को देखते हुए आयोजकों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया।सीजेपी ने वामपंथी छात्र संगठनों और 'स्टूडेंट्स ऑफ बंगाल' द्वारा पहले से आयोजित व स्वीकृत जुलूस में ही शामिल होने का निर्णय लिया।
कोलकाता कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि देदीप्य गांगुली ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया: "पुलिस प्रशासन की अनुमति न मिलने के कारण सीजेपी के अलग बैनर तले दोपहर 4 बजे का मार्च रद्द करना पड़ा। लेकिन हमारी लड़ाई रुकने वाली नहीं है। हमने फैसला किया है कि हमारे समर्थक और छात्र सियालदह से एस्प्लेनेड तक निकलने वाले संयुक्त छात्र मार्च में ही अपनी आवाज बुलंद करेंगे।"
सियालदह से एस्प्लेनेड तक गूंजे नारे
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 2:30 बजे सियालदह स्टेशन परिसर से यह विशाल संयुक्त जुलूस शुरू हुआ, जो एस. एन. बनर्जी रोड होते हुए धर्मतला (एस्प्लेनेड) पहुंचकर समाप्त हुआ।कोलकाता ट्रैफिक पुलिस के सूत्रों के अनुसार, यदि दो अलग-अलग मार्गों से रैलियां एस्प्लेनेड पहुंचतीं, तो सेंट्रल एवेन्यू, कॉलेज स्ट्रीट, एजेसी बोस रोड और एसएन बनर्जी रोड पर गंभीर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती थी। इसलिए संयुक्त रूप से एक ही रूट पर रैली निकाले जाने से आम लोगों को ट्रैफिक की समस्या से राहत मिली।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
सड़कों पर उतरे छात्रों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए चार प्रमुख मांगें रखीं:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: नीट परीक्षा में लगातार धांधली और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
- NTA को भंग करना: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है, अतः इसे तुरंत रद्द या पूरी तरह पुनर्गठित किया जाए।
- पुलिस बर्बरता की न्यायिक जांच: दिल्ली में 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और दोषी अधिकारियों को सजा मिले।
- पीड़ितों को मुआवजा: परीक्षा के मानसिक तनाव और भ्रष्टाचार के कारण आत्महत्या करने वाले नीट परीक्षार्थियों के पीड़ित परिवारों को उचित वित्तीय सहायता और मुआवजा दिया जाए।
सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया का माहौल
सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को लेकर बंगाल के युवाओं और अभिभावकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। इंटरनेट पर 'कॉकरोचेस ऑफ बंगाल एक हो' (Cockroaches of Bengal Unite) जैसे नारे तेजी से वायरल हो रहे हैं।दूसरी ओर, राजनीतिक हलचलों पर नजर रख रहे पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा:"हमारी पार्टी या सरकार किसी भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के खिलाफ नहीं है। हालांकि, प्रदर्शन के नाम पर जादवपुर विश्वविद्यालय जैसे हॉस्टलों से छात्रों को जबरन सड़कों पर खींचना या बाध्य करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"गौरतलब है कि इससे पहले भी जादवपुर यूनिवर्सिटी के सामान्य छात्रों और अभिभावकों ने नीट धांधली के खिलाफ कोलकाता की सड़कों पर विशाल पैदल मार्च निकाला था। शुक्रवार को सियालदह से धर्मतला तक निकले इस संयुक्त मार्च ने साबित कर दिया है कि केंद्र की शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली के खिलाफ छात्रों का यह आक्रोश थमने वाला नहीं है।