दीघा/अगरतला: आगामी गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को पवित्र श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के अवसर पर देश के प्रसिद्ध पर्यटन व आध्यात्मिक केंद्र दीघा (पश्चिम बंगाल) और त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में भव्य तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, उनके अग्रज श्री बलदेव और बहन देवी सुभद्रा के रथों को नया रूप दिया जा रहा है। इस महायात्रा का गवाह बनने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
दीघा में ऐतिहासिक रथयात्रा: मुख्य अतिथि होंगे शिशिर अधिकारी
पूर्वी भारत के नए आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरे दीघा के श्री श्री जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष रथयात्रा का आयोजन भव्य स्तर पर किया जा रहा है। मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास ने बताया कि रथयात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवता, समानता और भाईचारे का प्रतीक है।
मुख्य पुजारी राधारमण दास ने कहा: "महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर आकर खुद अपने भक्तों के द्वार तक जाते हैं और बिना किसी जाति, धर्म या भाषा के भेदभाव के सभी को अपनी असीम कृपा प्रदान करते हैं।"
उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने दीघा के श्री श्री जगन्नाथ कल्चरल सेंटर समेत बंगाल की सभी प्रमुख रथयात्राओं को ₹5 लाख की विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की है।इस वर्ष रथयात्रा के मुख्य अतिथि के रूप में वयोवृद्ध नेता श्री शिशिर अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

दीघा रथयात्रा का आधिकारिक समय-सारणी (16 जुलाई 2026)
- सुबह 10:30 बजे: वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन के बीच मंदिर से तीनों रथों पर भगवान का पारंपरिक 'पहांडी-विजय' (रथारूढ़ होना)।
- दोपहर 01:00 से 02:30 बजे: रथों का विशेष श्रृंगार, वस्त्रालंकरण और महाप्रभु को भोग निवेद्य।
- दोपहर 03:00 बजे: मुख्य अतिथि श्री शिशिर अधिकारी का मंदिर आगमन।
- दोपहर 03:00 से 03:30 बजे: रथयात्रा का औपचारिक उद्घाटन समारोह।
- दोपहर 03:30 बजे: महाप्रभु की पावन रथयात्रा का शुभारंभ।
- शाम 04:30 बजे: रथों का मौसी मां (गुंडिचा) मंदिर पहुंचना।
- शाम 05:30 बजे: गुंडिचा मंदिर में भगवान का पहांडी-विजय।
अगरतला में भी रथयात्रा की धूम, सजेगा पांच दिवसीय मेला
दूसरी ओर, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित ऐतिहासिक श्री श्री जगन्नाथ जीओ मंदिर में भी रथयात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं। मंदिर के महाराज ने बताया कि इस बार रथयात्रा उत्सव को बेहद व्यवस्थित और प्रशासन के सुरक्षा मानकों के तहत आयोजित किया जा रहा है।
अगरतला में रथयात्रा के अवसर पर पांच दिवसीय भव्य धर्मसभा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक मेले का आयोजन किया जाएगा। इस धर्मसभा में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने से साधु-संत और आध्यात्मिक गुरु अगरतला पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में महाप्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है।
क्या है रथयात्रा का आध्यात्मिक महत्व?
शास्त्रों के अनुसार, रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने मुख्य मंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर (मौसी मां के घर) जाते हैं, जहां वे कुछ दिन विश्राम करते हैं। इस दौरान रथ की रस्सी को खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।इसके बाद बहुड़ा यात्रा (उल्टा रथ) के दिन भगवान वापस अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं। वापसी के दौरान भगवान जगन्नाथ को उनका प्रिय 'पोड़ा पीठा' (एक विशेष बंगाली/उड़िया मिठाई) अर्पित किया जाता है। मुख्य मंदिर लौटने पर भगवान का 'सोनावेश' (स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार), 'अधरपाना' और 'नीलाद्रि विजय' जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक रस्में पूरी की जाती हैं।