कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) परिसर में 19 और 20 अगस्त को हुई अप्रिय घटनाओं की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति को बड़ा झटका लगा है। समिति के अध्यक्ष बनाए गए नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति शुभशंकर सरकार ने इस पद की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है। उन्होंने 22 अगस्त को जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य को औपचारिक पत्र भेजकर अपने निर्णय की जानकारी दी।
व्यक्तिगत व्यस्तता का दिया हवाला
कुलपति को लिखे पत्र में शुभशंकर सरकार ने अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण वे जांच समिति का नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा के बाद अत्यंत दुख के साथ उन्हें यह फैसला लेना पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने समिति के सफल कार्य संचालन के लिए शुभकामनाएं और आभार भी व्यक्त किया।

RSS के शिक्षक संगठन ने दर्ज कराई थी आपत्ति
उल्लेखनीय है कि शुभशंकर सरकार को जांच समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े शिक्षक संगठन 'अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ' ने शनिवार को कड़ा विरोध दर्ज कराया था। संगठन का आरोप था कि अतीत में शिक्षक भर्ती से जुड़े विवादों में शुभशंकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठे थे, इसलिए उन्हें इस महत्वपूर्ण जांच से दूर रखा जाना चाहिए।
जांच प्रक्रिया की गति धीमी होने की आशंका
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 19 और 20 अगस्त को कैंपस में हुए विवाद की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें बाबा साहेब अंबेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति अरुणाशीष गोस्वामी और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के IQAC निदेशक सौमेंदु चट्टोपाध्याय बतौर सदस्य शामिल हैं। शुभशंकर सरकार के अचानक हटने के बाद अब जांच प्रक्रिया प्रभावित होने और इसमें देरी होने की संभावना जताई जा रही है।