कोलकाता: पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव हुआ है। विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) सलीम बक्स मंडल और कार्यवाहक वित्त अधिकारी शिलादित्य चटर्जी को उनके मौजूदा पदों से हटाने का आदेश दिया गया है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 8 सितंबर तक दोनों अधिकारी क्रमशः कार्यवाहक रजिस्ट्रार और कार्यवाहक वित्त अधिकारी के रूप में दर्ज थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देवजीत दत्ता को नया रजिस्ट्रार बनाया गया है, जबकि कला संकाय के सचिव डॉ. इंद्रजीत बनर्जी को कार्यवाहक वित्त अधिकारी की जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है। दोनों नियुक्तियां अंतरिम अवधि के लिए हैं और स्थायी नियुक्ति होने तक व्यवस्था चलाने का प्रावधान है।
छह महीने से ज्यादा कार्यवाहक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस प्रशासनिक बदलाव के पीछे मुख्य मुद्दा कार्यवाहक अधिकारियों की नियुक्ति की अवधि को लेकर है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति की ओर से जारी आदेश में जादवपुर यूनिवर्सिटी एक्ट, 1981 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कार्यवाहक रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की व्यवस्था की समीक्षा की गई। आदेश में यह सवाल उठाया गया कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यवाहक व्यवस्था लंबे समय तक जारी क्यों रही और स्थायी नियुक्ति की वैधानिक प्रक्रिया समय पर क्यों नहीं पूरी की गई। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्थायी रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड का हैंडओवर
प्रशासनिक बदलाव के साथ निवर्तमान अधिकारियों को विश्वविद्यालय के जरूरी रिकॉर्ड नए पदाधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसमें आधिकारिक फाइलें, वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल क्रेडेंशियल्स, कार्यालय की सील और अन्य प्रशासनिक सामग्री शामिल हैं। इस तरह के निर्देश का उद्देश्य पद परिवर्तन के दौरान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज में किसी तरह की रुकावट या रिकॉर्ड को लेकर विवाद की स्थिति पैदा होने से रोकना है।
पहले से विवादों में रहा है रजिस्ट्रार पद
जादवपुर यूनिवर्सिटी में कार्यवाहक रजिस्ट्रार सलीम बक्स मंडल का कार्यकाल पिछले कुछ समय से विवादों के केंद्र में रहा है। अगस्त में कैंपस में कथित तोड़फोड़ की जांच के लिए गठित समिति के अध्यक्ष के इस्तीफे के मामले में भी मंडल ने विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिक्रिया दी थी। इसके अलावा अगस्त में विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम के दौरान कर्मचारी संगठन की ओर से कार्यवाहक रजिस्ट्रार और कार्यवाहक वित्त अधिकारी को हटाने की मांग भी सामने आई थी। हालांकि, मौजूदा प्रशासनिक बदलाव को केवल इन राजनीतिक या कैंपस विवादों से जोड़ना उचित नहीं होगा। आधिकारिक आदेश में नियुक्ति की अवधि और वैधानिक प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों को प्रमुख आधार बनाया गया है।
अब स्थायी नियुक्ति पर नजर
नए अंतरिम पदाधिकारियों के सामने विश्वविद्यालय के नियमित प्रशासनिक कामकाज को सुचारु रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी। साथ ही, स्थायी रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया कितनी जल्दी शुरू होती है, इस पर भी नजर रहेगी। जादवपुर यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर 8 सितंबर तक सलीम बक्स मंडल और शिलादित्य चटर्जी के नाम क्रमशः Acting Registrar और Acting Finance Officer के तौर पर दर्ज थे।