कोलकाता: पश्चिम बंगाल के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में दीवारों पर लिखे स्लोगन को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद परिसर की विवादास्पद और तथाकथित राष्ट्रविरोधी दीवारों को शनिवार और रविवार को चूना पोतकर साफ किया गया था। हालांकि, सफाई के 12 घंटे बीतने से पहले ही रविवार रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों ने ओपन एयर थिएटर (OAT) की उसी दीवार पर फिर से कार्ल मार्क्स की चार पंक्तियां लिख दीं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद परिसर और राज्य की राजनीति में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।
सफाई के तुरंत बाद कार्ल मार्क्स के कथन से नई चुनौती
विश्वविद्यालय के मुक्त प्रेक्षागृह (ओपन एयर थिएटर) की जिस दीवार को रविवार को सफेदी करके साफ किया गया था, उसी पर रात में कार्ल मार्क्स का एक प्रसिद्ध कथन लिखा गया। इसका हिंदी अनुवाद है: “हमारे पास कोई दया नहीं है / हम आपसे भी किसी दया की उम्मीद नहीं करते। जब हमारी बारी आएगी, तो हम उस समय के आतंक के लिए कोई बहाना नहीं बनाएंगे।” इस स्लोगन के सामने आने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि यह वामपंथी छात्र समूहों की करतूत है। हालांकि, एसएफआई (SFI) ने स्पष्ट किया है कि वे अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में दोबारा दीवार लेखन करेंगे।
प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
यह पूरा मामला 19 अगस्त की रात वामपंथी छात्र संगठनों और आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच हुई हिंसक झड़प से शुरू हुआ था। इसके बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़ा संदेश दिया था कि आर्ट्स हॉस्टल और परिसर के भीतर 'किशनजी रेड सैल्यूट' या देशविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश और कार्यवाहक कुलपति से बातचीत के बाद कार्यवाहक रजिस्ट्रार सलीम बॉक्स मंडल की देखरेख में 'किशनजी', 'फ्री पैलेस्टाइन' और 'फैसिस्ट डू नॉट डिजर्व डेमोक्रेसी' जैसे स्लोगन मिटा दिए गए थे।
छात्र संगठनों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
दीवारों से स्लोगन मिटाए जाने को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है:
- सीपीआईएम और एसएफआई: युवा माकपा नेता शतरूप घोष ने सवाल उठाया कि "क्या 'सबके लिए शिक्षा और काम' की मांग करना देशविरोधी है?" वहीं एसएफआई के राज्य सचिव देबांजन दे ने कहा कि "दीवारें पोतकर इतिहास नहीं मिटाया जा सकता" और विश्वविद्यालय में जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव कराने की मांग की।
- एबीवीपी (ABVP): एबीवीपी का दावा है कि रात में कार्ल मार्क्स का स्लोगन लिखना अति-वामपंथियों या नक्सलियों का काम है। वे इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे।
- दिलीप घोष (राज्य मंत्री): राज्य के पंचायत एवं ग्रामोन्नयन मंत्री दिलीप घोष ने इस मुद्दे पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कार्ल मार्क्स के विचार प्रतिबंधित नहीं हैं, उनका कोई भी उद्धरण लिखा जा सकता है।"
परिसर में फिर से तनाव की आशंका
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में जब भी कोई आपत्तिजनक या विवादास्पद टिप्पणी लिखी जाएगी, उसे नियमानुसार हटाया जाएगा। हालांकि, 12 घंटे के भीतर दोबारा स्लोगन लिखे जाने से सोमवार को परिसर में नया विवाद और गतिरोध पैदा होने की पूरी आशंका बनी हुई है।