कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भाजपा विधायक शर्वरी मुखर्जी अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। घायल ABVP कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद उनके कथित ‘रातभर तांडव’ वाले बयान पर राजनीतिक विरोध तेज हुआ। इसके बाद विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन की बात करना था।
‘रातभर तांडव’ वाले बयान से शुरू हुआ विवाद
बुधवार रात विश्वविद्यालय परिसर में झड़प के बाद शर्वरी मुखर्जी घायल ABVP छात्रों से मिलने पहुंची थीं। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर हिंसा के आरोपियों ने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो हॉस्टलों में जाकर कार्रवाई की जाएगी और ‘रातभर तांडव’ होगा। उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय को कथित तौर पर नक्सली और देशविरोधी गतिविधियों का केंद्र बनने से रोकने की बात भी कही थी। इसके बाद गुरुवार को विश्वविद्यालय के बाहर तनाव और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और परिसर के गेट पर चढ़ गए। इसी दौरान नंदलाल बोस द्वारा डिजाइन किए गए विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रतीक को नुकसान पहुंचा।
बयान पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
शर्वरी मुखर्जी की टिप्पणी सामने आने के बाद विपक्षी दलों और अन्य राजनीतिक समूहों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। आरोप लगाया गया कि उनके बयान से विश्वविद्यालय में तनाव और बढ़ सकता था। विवाद बढ़ने के बाद विधायक ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी तरह की हिंसा भड़काने की बात नहीं कही थी, बल्कि हिंसा के आरोपियों को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कराने की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह शांतिपूर्ण आंदोलन में विश्वास रखती हैं और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना हर व्यक्ति का अधिकार है।
भाजपा ने भी बयान से बनाई दूरी
मामला बढ़ने के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि ABVP एक स्वतंत्र छात्र संगठन है। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन के नेताओं या कार्यकर्ताओं के व्यक्तिगत बयान और गतिविधियों के लिए भाजपा को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस जांच के घेरे में पूरा घटनाक्रम
जादवपुर विश्वविद्यालय में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने आगजनी, तोड़फोड़ और ऐतिहासिक प्रतीक को नुकसान पहुंचाने समेत विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल के वीडियो फुटेज और सोशल मीडिया पर सामने आए बयानों की भी जांच की जा रही है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और विवादित बयानों के बाद घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।