कोलकाता: कोलकाता नगर निगम की ओर से जनगणना 2027 के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों की अनिवार्य ड्यूटी लगाए जाने को लेकर विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। शिक्षक संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी इस व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में पठन-पाठन की जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्हें जनगणना कार्य भी करना पड़ रहा है। इसके अलावा कई शिक्षकों को उनके स्थानीय वार्ड में ड्यूटी देने के बजाय दूसरे और दूर-दराज के वार्डों में भेजा जा रहा है। इसी को लेकर विभिन्न मंचों और कोलकाता नगर निगम के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया है।
अनिवार्य जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों में नाराजगी
कोलकाता नगर निगम ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए जनगणना ड्यूटी को अनिवार्य किया है। आदेश के मुताबिक, उचित कारण के बिना ड्यूटी से इनकार करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी परेशानी का कारण बन रही है क्योंकि उन्हें स्कूल में नियमित पठन-पाठन की जिम्मेदारी के साथ जनगणना का काम भी करना पड़ रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में शिक्षकों पर अतिरिक्त जनगणना ड्यूटी की जिम्मेदारी आने से काम का दबाव बढ़ रहा है। शिक्षकों का विरोध इसी अतिरिक्त जिम्मेदारी को लेकर है। उनका कहना है कि एक तरफ विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी है और दूसरी तरफ जनगणना का काम करना पड़ रहा है।
स्थानीय वार्ड के बजाय दूर-दराज के इलाकों में ड्यूटी
शिक्षकों की सबसे बड़ी आपत्तियों में से एक उन्हें स्थानीय वार्ड से बाहर जनगणना ड्यूटी के लिए भेजा जाना है। शिक्षकों के अनुसार, कई मामलों में उन्हें अपने क्षेत्र के बजाय काफी दूर के वार्डों में ड्यूटी दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर वार्ड 32 से वार्ड 132 जैसे क्षेत्रों में ड्यूटी दिए जाने की बात सामने आई है। इससे शिक्षकों को रोजाना आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय क्षेत्र में ड्यूटी मिलने के बजाय दूर के इलाकों में भेजे जाने से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था को लेकर विभिन्न मंचों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कोलकाता नगर निगम के समक्ष भी इस समस्या को उठाया गया है। शिक्षकों की मांग है कि ड्यूटी तय करते समय उनके कार्यक्षेत्र और आवागमन की समस्या को ध्यान में रखा जाए।
पठन-पाठन और पाठ्यक्रम पूरा करने को लेकर चिंता
जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों की एक बड़ी चिंता स्कूलों के पठन-पाठन से जुड़ी है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में मौजूद शिक्षकों को कक्षाओं की जिम्मेदारी के साथ जनगणना का काम भी करना पड़ रहा है। इससे स्कूलों में नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षकों के अनुसार, विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना भी जरूरी है। लेकिन अतिरिक्त जनगणना ड्यूटी के कारण शिक्षकों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। शिक्षक संगठनों ने इसी आधार पर इस व्यवस्था पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी पठन-पाठन है और अतिरिक्त ड्यूटी के कारण उस पर असर पड़ने की चिंता बनी हुई है।
जनगणना ड्यूटी से इनकार पर कार्रवाई की चेतावनी
जनगणना ड्यूटी को लेकर जारी व्यवस्था में बिना उचित कारण ड्यूटी से इनकार करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इसके लिए जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जुर्माना या सजा का प्रावधान होने की बात कही गई है। इस चेतावनी ने भी शिक्षकों के बीच असंतोष को बढ़ाया है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अनिवार्य रूप से जनगणना कार्य करने की जिम्मेदारी दी जा रही है। वहीं, दूसरी ओर उन्हें स्कूल की नियमित शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी निभानी हैं। इसके अलावा दूर-दराज के वार्डों में भेजे जाने से आवागमन की परेशानी भी जुड़ रही है। शिक्षक संगठन इन सभी मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। कोलकाता नगर निगम के सामने भी शिक्षकों की ओर से इस व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया गया है।
शिक्षक संगठनों और राजनीतिक स्तर पर विरोध
जनगणना ड्यूटी की व्यवस्था को लेकर शिक्षक संगठनों की ओर से लगातार असंतोष जताया जा रहा है। इसके साथ ही राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है। विरोध का मुख्य कारण अनिवार्य ड्यूटी, दूर-दराज के वार्डों में तैनाती और स्कूलों के पठन-पाठन पर पड़ने वाला संभावित असर है। शिक्षकों का कहना है कि जनगणना कार्य के लिए उन्हें स्कूल की नियमित जिम्मेदारियों के बाद अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। वहीं, दूर के वार्डों में ड्यूटी मिलने से आवागमन की परेशानी अलग है। इन समस्याओं को लेकर विभिन्न मंचों पर विरोध दर्ज कराया गया है। कोलकाता नगर निगम के समक्ष भी शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने अपनी नाराजगी रखी है। पूरे मामले को लेकर शिक्षकों की आपत्ति मुख्य रूप से ड्यूटी व्यवस्था और उसके कारण बढ़ रहे काम के दबाव पर है।
शिक्षकों की मुख्य आपत्तियां क्या हैं?
शिक्षकों की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों में सबसे प्रमुख मुद्दा जनगणना ड्यूटी का अनिवार्य होना है। इसके अलावा स्थानीय वार्ड के बजाय दूर-दराज के वार्डों में ड्यूटी दिए जाने को लेकर भी विरोध है। शिक्षकों का कहना है कि इससे उन्हें आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बीच अतिरिक्त जनगणना ड्यूटी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों के अनुसार, स्कूल में पठन-पाठन की जिम्मेदारी निभाने के साथ जनगणना कार्य का दबाव बढ़ रहा है। इससे पाठ्यक्रम पूरा करने में बाधा आने की चिंता है। बिना उचित कारण ड्यूटी से इनकार करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी शिक्षकों के असंतोष का एक कारण है। इन्हीं मुद्दों को लेकर शिक्षक संगठन और राजनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा रहा है।