कोलकाता: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर गुरुवार को कोलकाता के धर्मतला में वाम मोर्चा की ओर से विरोध सभा आयोजित की गई। वाम मोर्चा के 12 संगठनों की भागीदारी वाले इस प्रदर्शन में केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर आवाज उठाई गई। वहीं, सुबोध मल्लिक स्क्वायर से सभा स्थल तक वामपंथी छात्र और युवा संगठनों ने जुलूस निकाला।
दिल्ली के बाद अब कोलकाता में भी वामपंथियों का प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर दिल्ली में विपक्षी राजनीतिक दल पहले से ही आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के साथ वामपंथी नेताओं को भी इस आंदोलन में एकजुट देखा गया है। अब इसी मांग को लेकर कोलकाता में भी वाम मोर्चा ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। हालांकि, वामपंथियों ने पहले रानी रासमणि रोड पर सभा आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गई। इसके बजाय धर्मतला के वाई चैनल में दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक सभा करने की अनुमति दी गई। पुलिस की ओर से इसके पीछे संभावित यातायात जाम का हवाला दिया गया।
'एसआईआर में करीब साढ़े 13 करोड़ लोगों के नाम काटे गए', विमान बोस ने चुनाव आयोग को घेरा
सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ वामपंथी नेता विमान बोस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब साढ़े 13 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में संशोधन के लिए जिस प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था, उसका पालन नहीं किया गया। चुनाव आयोग के गठन में जिस तरह से हस्तक्षेप किया गया, वैसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आयोग के खिलाफ लोगों में आक्रोश और असंतोष बढ़ रहा है। विमान बोस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखना होगा।
'संविधान को कुचला जा रहा है', सीपीआई नेता स्वपन बंद्योपाध्याय का आरोप
सीपीआई नेता स्वपन बंद्योपाध्याय ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान को कुचलकर देश में एक केंद्रीकृत सत्ता स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख का उल्लेख करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने भाजपा के खिलाफ वैचारिक संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, यह लड़ाई वामपंथी विचारधारा और आरएसएस की विचारधारा के बीच है।
'भाजपा सिर्फ वोट नहीं, राजनीतिक दलों की भी चोरी कर रही है', फॉरवर्ड ब्लॉक नेता का हमला
फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता गोविंद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा केवल वोट चोरी नहीं कर रही, बल्कि राजनीतिक दलों को भी तोड़ने और अपने पक्ष में करने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में वामपंथी ही एकमात्र विकल्प हैं। एसआईआर के बाद मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने का दावा करते हुए उन्होंने जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में हजारों आवेदन लंबित होने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से हटाने तक वामपंथियों का संघर्ष जारी रहेगा।
'बूथ-बूथ और घर-घर जाकर लोगों की जानकारी जुटानी होगी'
गोविंद ने वामपंथी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर और घर-घर जाकर लोगों की जानकारी जुटाने की अपील की। भाजपा के खिलाफ वोट देने के बाद भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं को उन्होंने विश्वासघाती करार दिया। उन्होंने बुलडोजर की राजनीति, मनीषों के अपमान और बंगाल के बड़े त्योहारों के दौरान पुस्तक स्टॉल तोड़े जाने जैसे मुद्दों को उठाकर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करेगी और वामपंथियों को फिर से मौका देगी। इसके साथ ही इंडिया गठबंधन के भीतर और बाहर मौजूद वामपंथी विचारधारा के लोगों, जेन जी और जेन अल्फा को एकजुट करने की अपील भी की।
'एसआईआर आरएसएस का कोर एजेंडा', मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
सभा के अंत में सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले भाजपा की रैली के लिए पुलिस ने पूरी सड़क बंद कर दी थी। एसआईआर को आरएसएस के मूल एजेंडे का हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि देश में मंदिर-मस्जिद और धर्म की राजनीति के जरिए एक खास राजनीतिक विमर्श तैयार किया जा रहा है।
'मृत और स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान अलग से हो सकती थी'
मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि मताधिकार छीनने की एक ऐसी लहर तैयार की जा रही है, जिससे कोई भी वर्ग अछूता नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची में नामों का सही तरीके से पंजीकरण और संशोधन करना है, लेकिन चुनाव आयोग ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। उनके मुताबिक, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान अलग-अलग करके की जा सकती थी, लेकिन इसके बजाय सभी को एक ही प्रक्रिया में खड़ा कर दिया गया। उन्होंने 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' यानी तार्किक विसंगति के मुद्दे को भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया में अनियमितता बताया।
विपक्षी एकता पर जोर, 'वोट चोरी के खिलाफ है हमारी लड़ाई'
वामपंथी आंदोलन को व्यापक बनाने की अपील करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि पार्टी, व्यक्ति और अलग-अलग संगठनों को एकजुट होना होगा। हालांकि, जिन लोगों पर खुद वोट चोरी के आरोप हैं, उन्हें इस आंदोलन में शामिल करने को लेकर सावधानी बरतनी होगी। उन्होंने कहा कि लड़ाई वोट चोरी के खिलाफ है और जब भी व्यापक एकता बनाई जाए, उसमें किसी तरह की कमजोरी या दरार नहीं रहनी चाहिए। सलीम ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष आंदोलन में फूट डालने की कोशिश करेगा।
राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान पर पुलिस कमिश्नर को चुनौती
सभा के दौरान मोहम्मद सलीम ने राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में कार्रवाई करें। अन्यथा वामपंथी छात्र और युवा संगठन की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
कुल मिलाकर, दिल्ली के बाद अब कोलकाता में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वामपंथियों ने अपनी आवाज बुलंद की। एसआईआर, मताधिकार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए वामपंथी नेताओं ने आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाने का संकेत दिया।