कोलकाता: दिल्ली में कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती अंशों को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमीक भट्टाचार्य ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा, उसके इतिहास और देश के विभाजन को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। साथ ही, उन्होंने बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस नेता काजल शेख के इस्तीफे और जादवपुर विश्वविद्यालय में हालिया छात्र झड़प पर भी प्रतिक्रिया दी।
‘संविधान और कानून को चुनौती दे रही कांग्रेस’
शमीक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को देश के कानून और संविधान पर भरोसा नहीं है, उससे सम्मान की उम्मीद नहीं की जा सकती।‘वंदे मातरम’ विवाद पर उन्होंने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि वह राष्ट्रगीत को लेकर देश को क्या संदेश देना चाहती है। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति को साम्प्रदायिक और विभाजनकारी भी बताया।
‘कांग्रेस ने वंदे मातरम के साथ समझौता किया’
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इतिहास में ‘वंदे मातरम’ को लेकर समझौते किए और आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 1937 में वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को लेकर लिया गया फैसला भारत के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की तत्कालीन राजनीति और सत्ता की महत्वाकांक्षा ने आगे चलकर देश के विभाजन का रास्ता तैयार किया। शमीक भट्टाचार्य ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी संदर्भ देते हुए दावा किया कि यदि नेताजी को कांग्रेस से अलग नहीं किया गया होता तो भारत का विभाजन नहीं होता। हालांकि, विभाजन और 1937 के वंदे मातरम विवाद को लेकर शमीक भट्टाचार्य द्वारा किए गए ये दावे उनके राजनीतिक बयान हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
काजल शेख के इस्तीफे पर भी साधा निशाना
बीरभूम जिला परिषद के तृणमूल कांग्रेस नेता काजल शेख के इस्तीफे और उनके खिलाफ पार्टी के भीतर अविश्वास प्रस्ताव के सवाल पर शमीक भट्टाचार्य ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि मीडिया में काजल शेख के इस्तीफे और तृणमूल की आंतरिक गुटबाजी को जिस तरह प्रमुखता मिल रही है, वह बंगाल के सांस्कृतिक परिदृश्य को लेकर चिंता पैदा करता है। उन्होंने कहा कि लोग जीवनसाथी, सौमित्र चट्टोपाध्याय, शंख घोष, शक्ति चट्टोपाध्याय, सत्यजीत राय, ऋत्विक घटक और विभास चक्रवर्ती जैसी महान हस्तियों के योगदान को भूलते जा रहे हैं, जबकि राजनीतिक विवादों से जुड़े नेताओं को लगातार सुर्खियां मिल रही हैं। उन्होंने इसे बंगाल के सांस्कृतिक पतन का उदाहरण बताया।
उत्तर प्रदेश चुनाव पर कांग्रेस-SP गठबंधन को घेरा
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए शमीक भट्टाचार्य ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को ‘पैरासाइट’ यानी परजीवी राजनीतिक संगठन बताया। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल चुनावों में बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन अंततः भाजपा भारी बहुमत के साथ सरकार बनाती है और भविष्य में भी ऐसा ही होगा।
जादवपुर विश्वविद्यालय हिंसा पर BJP का बचाव
जादवपुर विश्वविद्यालय में हालिया छात्र संगठनों की झड़प पर भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है और ABVP एक स्वतंत्र राष्ट्रीय छात्र संगठन है, जो अपने निर्णय स्वयं लेता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर या उसके बाहर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में उचित कानूनी कार्रवाई करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष
‘वंदे मातरम’ विवाद ने एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। शमीक भट्टाचार्य ने इस मुद्दे को कांग्रेस के इतिहास और विभाजन से जोड़ते हुए हमला बोला, वहीं काजल शेख के इस्तीफे और जादवपुर विश्वविद्यालय की हिंसा पर भी उन्होंने विपक्षी दलों को घेरा।