अलीपुरद्वार: पश्चिम बंगाल के शालकुमारहाट इलाके में हाईवे निर्माण से निकलने वाली मिट्टी को कथित तौर पर डंपरों के जरिए दूसरी जगहों पर ले जाकर डालने का मामला सामने आया है। रविवार को दिनदहाड़े राज्य सड़क पर एक के बाद एक डंपर पहुंचते दिखाई दिए। आरोप है कि इन डंपरों से कहीं सड़क किनारे तो कहीं मंदिर के पास नीची जमीन पर मिट्टी गिराई जा रही थी।
डंपर फंसने से सड़क पर लगा भीषण जाम
मिट्टी डालने के दौरान एक डंपर राज्य सड़क पर ही फंस गया। इसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और देखते ही देखते लंबा जाम लग गया। जाम के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिलतोरषा नदी के चर से निकाली जा रही मिट्टी
स्थानीय लोगों के अनुसार, शिलतोरषा नदी के चर इलाके यानी गारारजोत से मिट्टी काटकर फालाकाटा के रायचेंगा, असम मोड़ और बालुरघाट समेत अलग-अलग स्थानों पर हाईवे निर्माण के लिए पहुंचाई जा रही है। बताया जा रहा है कि हाईवे निर्माण के लिए मिट्टी काटने की अनुमति राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास है।
मिट्टी की कमी का फायदा उठाने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम लोगों के लिए जमीन भरने या दुकान निर्माण जैसे कामों के लिए मिट्टी मिलना मुश्किल है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कथित तौर पर एक अवैध कारोबार खड़ा हो गया है। शालकुमारहाट और पलाशबाड़ी इलाके में सड़क किनारे नालों और नीची जमीन को भरने के लिए कुछ लोग कथित तौर पर हाईवे की मिट्टी खरीद रहे हैं।
पहले रात में चोरी का आरोप, अब दिन में भी गतिविधि
स्थानीय स्तर पर पहले भी तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में रात के अंधेरे में हाईवे की मिट्टी ले जाने के आरोप लगते रहे हैं। राजनीतिक बदलाव और विधानसभा चुनाव के बाद कुछ समय तक यह गतिविधि बंद रहने की बात कही जा रही थी। अब एक बार फिर इस तरह की गतिविधियां शुरू होने के आरोप लगे हैं।
डंपर चालक ने राजनीतिक दबाव का किया दावा
मामले में रफीजुल इस्लाम नाम के एक डंपर चालक ने कथित तौर पर कहा कि डंपरों में हाईवे की ही मिट्टी है और राजनीतिक नेताओं के निर्देश पर इसे यहां डाला जा रहा है। हालांकि, चालक ने किसी नेता का नाम बताने से इनकार किया। उसके इस बयान के बाद मामले में राजनीतिक मिलीभगत के आरोप भी चर्चा में आ गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर उठाए सवाल
टोटो चालक राकेश हुसैन ने दावा किया कि रविवार को दस से अधिक डंपरों से खुलेआम मिट्टी गिराई गई। उन्होंने कहा कि डंपर फंसने के बाद सड़क पर जाम लग गया और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।
मिट्टी खरीदने वाले दुकानदार ने बताई अपनी मजबूरी
वहीं, जमीन भरने के लिए मिट्टी लेने वाले एक स्थानीय दुकानदार ने कहा कि बाजार में मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं है। जगह को भरने की जरूरत होने के कारण वह मिट्टी खरीद रहा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण कार्यों से निकलने वाली मिट्टी का इस्तेमाल आखिर किन नियमों के तहत किया जा रहा है।
BJP ने आरोपों से किया किनारा
मामले में राजनीतिक आरोपों पर भाजपा के फालाकाटा नंबर-3 मंडल कमेटी के उपाध्यक्ष सुरेन सरकार ने कहा कि उनकी पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस काम में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी का कोई सदस्य इसमें संलिप्त पाया जाता है तो मामले की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी जाएगी और जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
NHAI ने कहा- मिट्टी का इस्तेमाल हाईवे निर्माण में होना चाहिए
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की ओर से कहा गया कि हाईवे निर्माण से निकलने वाली मिट्टी का इस्तेमाल हाईवे निर्माण के काम में ही किया जाना चाहिए। प्राधिकरण ने यह भी कहा कि डंपर निजी लोगों के हो सकते हैं, लेकिन पूरे मामले की जांच की जा रही है।
प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
दिन के उजाले में राज्य सड़क पर डंपर खड़े कर मिट्टी गिराए जाने और उसके बाद जाम लगने की घटना ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद हाईवे की मिट्टी को कथित तौर पर दूसरी जगह पहुंचाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।