नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के पूर्व आप्त-सहायक (PA) सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार, 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी में जमीन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी की कार्रवाई, कथित वित्तीय लेन-देन और ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से जुड़े पहलुओं पर अदालत में तीखी बहस हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कथित तौर पर करीब ₹30 करोड़ के वित्तीय लेन-देन का उल्लेख किया, जबकि सुमित रॉय की ओर से उनके वकील ने पूछताछ की प्रक्रिया और जांच के तरीके पर सवाल उठाए।
₹30 करोड़ के लेन-देन का दावा
केंद्र और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने दावा किया कि जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं, जिनमें एक राजनीतिक दल के खाते से कथित तौर पर लगभग ₹30 करोड़ की राशि ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से जुड़े खाते में भेजी गई। मेहता ने कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में सामने आई रकम को पूरी तस्वीर नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे “हिमशैल की चोटी” बताते हुए दावा किया कि जांच आगे बढ़ने पर अन्य लेन-देन और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुमित रॉय से मामले से जुड़े प्रासंगिक सवाल पूछे गए हैं और पूछताछ की वीडियोग्राफी समेत संबंधित सामग्री अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
सुमित रॉय के वकील ने पूछताछ पर उठाए सवाल
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने केंद्रीय एजेंसी की पूछताछ प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि उनके मुवक्किल से लगातार करीब 11 दिनों तक घंटों पूछताछ की गई। वकील ने अदालत में दावा किया कि जिस मूल मामले के सिलसिले में जांच शुरू हुई थी, उससे संबंधित सवाल पूछताछ के दौरान पर्याप्त रूप से नहीं किए गए। बचाव पक्ष ने इस आधार पर जांच की दिशा और एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
जांच की गति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने जांच एजेंसी के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि जांच में ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ का संदर्भ जितना कम आए, एजेंसी के लिए उतना ही बेहतर होगा। अदालत ने जांच की गति और एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों को मामले में निष्पक्षता, पारदर्शिता और निरंतरता के साथ काम करना चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जांच की गति में कभी अत्यधिक सुस्ती और कभी अचानक अत्यधिक सक्रियता दिखाई देती है, जो जांच की विश्वसनीयता के लिए उचित नहीं है।
पूछताछ का पूरा रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सुमित रॉय से हुई पूछताछ का विस्तृत लिखित ट्रांसक्रिप्ट और संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। अब अदालत इस रिकॉर्ड के आधार पर पूछताछ की प्रक्रिया और जांच एजेंसी द्वारा उठाए गए कदमों का भी परीक्षण करेगी।
अगली सुनवाई अगले सोमवार
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार के लिए निर्धारित की है। उस समय अदालत के सामने पूछताछ का रिकॉर्ड और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज रखे जाने की उम्मीद है। फिलहाल, सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मामले में लगाए गए वित्तीय लेन-देन और अन्य आरोपों पर भी अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगे की सुनवाई और जांच के परिणामों पर निर्भर करेगा।