बारासात (उत्तर 24 परगना): पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला परिषद मुख्यालय में बुधवार को हिंदू जागरण मंच द्वारा आयोजित 'अखंड भारत संकल्प सप्ताह' कार्यक्रम के दौरान परिसर के ऐतिहासिक 'तितुमिर सभागार' का नाम बदलकर 'श्यामा प्रसाद भवन' कर दिया गया। इस दौरान आयोजकों ने सभागार की दीवार से 19वीं सदी के स्वतंत्रता सेनानी तितुमिर की तस्वीर हटाकर भारत केसरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर लगा दी। जिला मुख्यालय शहर बारासात में इस घटनाक्रम के सामने आते ही सामाजिक और राजनीतिक हलकों में विवाद गहरा गया है।
1986 से 'तितुमिर' के नाम से जाना जाता था सभागार
अविभाजित 24 परगना जिले के विभाजन के बाद 26 जून 1986 को उत्तर 24 परगना जिला परिषद की स्थापना हुई थी। स्थापना के समय से ही इस सभागार का नाम 19वीं सदी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और जमींदारों के अत्याचार के खिलाफ किसानों को संगठित करने वाले बादुड़िया के स्वतंत्रता सेनानी सैयद मीर निसार अली (तितुमिर) के नाम पर रखा गया था। तितुमिर अंग्रेजों के खिलाफ अपने प्रसिद्ध 'बांस के किले' (बांशेर केला) के संघर्ष के लिए जाने जाते हैं।

हिंदू जागरण मंच और बीजेपी का तर्क
नाम परिवर्तन को लेकर हिंदू जागरण मंच के नेता संजीव महतो ने कहा कि राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद हिंदुओं की सामाजिक विजय बाकी थी और अखंड भारत के संकल्प को लेकर यह कदम उठाया गया है। उन्होंने दावा किया कि इतिहास के अनुसार तितुमिर का रुख हिंदू विरोधी था। वहीं, बारासात संगठनात्मक जिला भाजपा लीगल सेल के संयोजक निमाई रॉय ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि देश की आजादी में तितुमिर की तुलना में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान काफी अधिक है।
नागरिक समाज और प्रबुद्ध वर्ग में आक्रोश
तितुमिर की तस्वीर हटाए जाने और नाम बदले जाने की खबर के बाद बारासात के नागरिक समाज और वरिष्ठ नागरिकों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि एक स्वतंत्रता सेनानी का अनादर करके तस्वीर हटाना बंगाल की सांस्कृतिक विरासत पर सीधा आघात है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस मामले में मुख्यमंत्री और राज्य प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
जिला परिषद प्रशासन की चुप्पी, बंकिम चंद्र को भी दी श्रद्धांजलि
ऐतिहासिक सभागार का नाम बदले जाने और तस्वीर हटाए जाने की घटना पर उत्तर 24 परगना जिला परिषद के सभाधिपति की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, कार्यक्रम के बाद संगठन के सदस्यों ने जिला परिषद भवन के समीप स्थित साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भी विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।