हावड़ा: पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के उलुबेरिया स्थित अतिरिक्त जिला सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), कोलकाता ने बड़ी कार्रवाई की है। एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ मिली शिकायत के आधार पर एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। आरोप था कि अधिकारी ने शिकायतकर्ता से सरकारी काम के बदले अवैध रूप से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी की टीम ने 31 अगस्त को उलुबेरिया के एडीएसआर कार्यालय में ट्रैप ऑपरेशन चलाया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अधिकारी को ₹20 हजार की रिश्वत लेते हुए कथित तौर पर रंगे हाथों पकड़ लिया गया। आरोपी के कब्जे से रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली गई। फिलहाल आरोपी अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।
शिकायत मिलते ही हरकत में आई एसीबी
मामले की शुरुआत एक विशेष शिकायत से हुई, जिसमें एडीएसआर कार्यालय के एक सरकारी अधिकारी पर अवैध रूप से रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अधिकारी ने एक सरकारी काम को पूरा करने के एवज में उससे पैसों की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने शिकायत से जुड़े तथ्यों और आरोपों की पड़ताल की। इसके बाद आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए जाल बिछाने की योजना बनाई गई। एसीबी की टीम ने पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को आरोपी अधिकारी से संपर्क करने के लिए कहा गया। इसके बाद टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए मौके पर निगरानी शुरू कर दी।
एडीएसआर कार्यालय में बिछाया गया जाल
31 अगस्त को एसीबी की टीम उलुबेरिया स्थित अतिरिक्त जिला सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंची। टीम ने शिकायतकर्ता के जरिए आरोपी अधिकारी तक रिश्वत की रकम पहुंचाने की कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से ₹20 हजार स्वीकार किए, एसीबी की टीम ने तत्काल कार्रवाई की। टीम ने आरोपी अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के कब्जे से ₹20 हजार की रिश्वत की रकम बरामद की गई। एसीबी ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इस कार्रवाई के बाद कार्यालय में भी हड़कंप मच गया। एसीबी अब इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
₹20 हजार की रिश्वत बरामद
ट्रैप ऑपरेशन के दौरान आरोपी सरकारी अधिकारी के पास से ₹20 हजार की रकम बरामद हुई है। यह वही रकम बताई गई है, जिसे शिकायतकर्ता से रिश्वत के तौर पर लिया गया था। एसीबी ने बरामद रकम को जांच का अहम हिस्सा माना है। अधिकारी को हिरासत में लेने के बाद उससे पूछताछ की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि रिश्वत की मांग किस सरकारी काम के बदले की गई थी। इसके साथ ही आरोपी अधिकारी की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। एसीबी यह भी देखेगी कि इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति का दबाव या सहयोग तो नहीं था। मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच
एसीबी की जांच फिलहाल केवल आरोपी अधिकारी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। इसके लिए कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। एसीबी यह भी पता लगाएगी कि आरोपी अधिकारी ने पहले भी इस तरह किसी व्यक्ति से अवैध रकम की मांग की थी या नहीं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों की ओर से मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। रिश्वत की मांग, रकम स्वीकार करने और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल किया जाएगा। फिलहाल आरोपी अधिकारी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कानून के तहत आगे बढ़ेगी कार्रवाई
रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। एसीबी की टीम मामले से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित करने और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद आरोपी को अदालत के समक्ष पेश किए जाने समेत आगे की कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि रिश्वत की मांग और स्वीकार किए जाने से जुड़े सभी तथ्यों को जांच में शामिल किया जाए। साथ ही इस बात की भी पड़ताल होगी कि आरोपी ने अपने पद का इस्तेमाल किस तरह किया। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आने वाले समय में इससे जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।