मुंबई: घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को भारी गिरावट के साथ हुई। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों पर बिकवाली का दबाव हावी हो गया, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 500 अंक तक टूट गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी महत्वपूर्ण 23,300 के स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में बाजार का रुख पूरी तरह कमजोर दिखाई दिया और अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
शुरुआती कारोबार में बाजार पर बिकवाली हावी
शेयर बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे प्रमुख इंडेक्स दबाव में आ गए। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 500 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 23,300 के अहम स्तर के नीचे पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों की कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में यह दबाव देखने को मिला। शुरुआती घंटों में बैंकिंग, आईटी और फार्मा शेयरों में बिकवाली ज्यादा दिखाई दी।
गिरावट के बाद बाजार ने संभलने की कोशिश की
हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी की कोशिश की, लेकिन प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही बने रहे। सुबह 9:26 बजे तक सेंसेक्स 177.78 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,168.39 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 52.10 अंक यानी 0.22 प्रतिशत टूटकर 23,353.50 के स्तर पर पहुंच गया। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौटता नहीं दिखा।
इंफोसिस और सन फार्मा जैसे दिग्गज शेयरों पर दबाव
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी रही। आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी इंफोसिस और फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी सन फार्मा के शेयरों में करीब दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इन हैवीवेट शेयरों में बिकवाली का असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। इसके अलावा अन्य कई ब्लूचिप शेयर भी दबाव में दिखाई दिए।
रुपये में मजबूती, डॉलर के मुकाबले बढ़त
शेयर बाजार की कमजोरी के बीच रुपये ने कुछ मजबूती दिखाई। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सात पैसे मजबूत होकर 95.69 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की यह बढ़त निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई, हालांकि इसका असर शेयर बाजार की गिरावट को रोकने में नहीं दिखा।
निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।