भोपाल | मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा सत्र के दौरान सदन में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसानों का सशक्तिकरण प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता और उद्यमी के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश को देश का खाद्य भंडार बनाए रखने के साथ-साथ वैश्विक एग्री-एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने का निर्णय
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष सरसों के रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत वृद्धि हुई है और द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार उत्पादन 15.71 लाख मीट्रिक टन अनुमानित है। वर्तमान में सरसों की औसत मंडी दर लगभग 6000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6200 रुपये प्रति क्विंटल है। इस अंतर की भरपाई के लिए सरसों को प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम (भावांतर योजना) के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है। योजना के तहत पंजीकृत किसानों को उनकी पात्रता अनुसार अंतर राशि का भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से बैंक खातों में किया जाएगा। इसकी प्रतिपूर्ति राज्य मूल्य स्थिरीकरण कोष से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सोयाबीन के लिए भावांतर योजना का सफल क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में किया जा चुका है, जिसके अंतर्गत लगभग 6.86 लाख किसानों को 1492 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किए गए।
उड़द पर हर किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस
सरकार ने मूंग की जगह उड़द उत्पादन को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ग्रीष्मकालीन उड़द फसल पर प्रति किसान 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त दिया जाएगा।यह निर्णय दलहनी फसलों के संतुलित उत्पादन, किसानों की आय वृद्धि और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
चना, मसूर और तुअर की मार्च से मई तक खरीदी
प्रदेश में चना और मसूर की फसल का प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत क्रमशः 6.49 लाख मीट्रिक टन (चना) और 6.01 लाख मीट्रिक टन (मसूर) उपार्जन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।तय एमएसपी पर खरीदी के लिए 24 मार्च से 30 मई 2026 तक की अवधि प्रस्तावित की गई है। किसानों का पंजीयन 20 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक किया जा रहा है। इसके अलावा खरीफ फसल तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजा गया है, जिसमें नाफेड और एनसीसीएफ जैसी केंद्रीय एजेंसियां सीधे खरीदी करेंगी।
किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली और पानी उपलब्ध करा रही है। साथ ही कृषि ऋण की सुविधा और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और उद्यमशील बनाना है।
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