ग्वालियर-चंबल अंचल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं के पुत्रों की एक बड़ी फौज राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार बैठी है। ये नेता पुत्र संगठन में विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें विधिवत रूप से कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिल सकी है। पार्टी की परिवारवाद विरोधी नीति इनकी राह में सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही है, हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा का रुख स्पष्ट रहा है कि संगठन में पद योग्यता, समर्पण और संघर्ष के आधार पर मिलते हैं, न कि पारिवारिक विरासत के चलते। इसके बावजूद पार्टी में ऐसे उदाहरण भी रहे हैं, जहां नेताओं के पुत्रों ने अपनी क्षमता के दम पर संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।
मुख्यमंत्री के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
अभी हाल ही में कुलैथ गांव में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने मंच से विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र का नाम लेकर राजनीतिक संकेत दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह तोमर भले ही मंच पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके पुत्र की मौजूदगी से यह मान लिया जाए कि अगली पीढ़ी भी सक्रिय है। इस बयान के बाद संगठन में यह चर्चा तेज हो गई कि आने वाले समय में नेता पुत्रों के लिए संगठन के दरवाजे खुल सकते हैं।
देवेंद्र सिंह तोमर | पिता – नरेंद्र सिंह तोमर
देवेंद्र सिंह तोमर,विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र हैं। वे लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं और क्षेत्र में उनकी उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री के मंच से नाम लेने के बाद उन्हें लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि संगठन में उन्हें भविष्य में बड़ी भूमिका मिल सकती है।
महान आर्यमन | पिता – ज्योतिरादित्य सिंधिया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महान आर्यमन सिंधिया फिलहाल क्रिकेट के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हालांकि राजनीति में उनकी संभावित एंट्री को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं,ग्वालियर-चंबल अंचल में उनका नाम राजनीतिक उत्तराधिकार की दौड़ में प्रमुखता से लिया जाता है।
सुकर्ण मिश्रा | पिता – नरोत्तम मिश्रा
पूर्व गृहमंत्री के पुत्र पार्टी के कार्यक्रमों और गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहते हैं। संगठन में अनुभव के बावजूद उन्हें अब तक कोई औपचारिक बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है, लेकिन वे राजनीतिक लॉन्चिंग की कतार में माने जाते हैं।
पीतांबर सिंह | पिता – ध्यानेंद्र सिंह
पूर्व मंत्री के पुत्र भी संगठन में सक्रिय हैं। वे क्षेत्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं और पार्टी के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं।
तुष्मुल झा | पिता – प्रभात झा
दिवंगत राज्यसभा सांसद के पुत्र भी भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं, लेकिन संगठन की नीति के चलते उन्हें अभी इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रांशु शेजवलकर | पिता – विवेक नारायण शेजवलकर
पूर्व सांसद के पुत्र भी ग्वालियर-चंबल अंचल में भाजपा के उभरते चेहरों में शामिल हैं। वे संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं और राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
परिवारवाद नीति बनाम संगठन की जरूरत
भाजपा की परिवारवाद विरोधी नीति इन नेता पुत्रों के राजनीतिक भविष्य के बीच सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न बनी हुई है। संगठन इन मामलों में संतुलन साधने की कोशिश करता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यदि संगठन को युवा नेतृत्व और क्षेत्रीय संतुलन की जरूरत पड़ी, तो इन नेता पुत्रों को जिम्मेदारी मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। फिलहाल ग्वालियर-चंबल अंचल में यह सवाल चर्चा में है कि क्या अगली पीढ़ी को संगठन की हरी झंडी मिलेगी या परिवारवाद की नीति इनकी राह रोकती रहेगी।
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