रायपुर। शराब घोटाले में आरोपी बनाए गए छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा करीब एक साल जेल में बिताने के बाद सोमवार को पहली बार विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए। सदन पहुंचने पर उन्होंने कांग्रेस और भाजपा विधायकों से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा विधायकों ने भी गले लगाकर उनका स्वागत किया।
शराब घोटाले से जुड़े मामले में लखमा लगभग एक वर्ष तक जेल में रहे, जिस कारण वे विधानसभा सत्र में भाग नहीं ले सके। उन्हें 3 फरवरी को उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिली। इसके बाद 7 फरवरी को विधानसभा की ओर से उनका अभिमत मांगा गया, जिस पर उन्होंने 2026 में सहमति दी। निर्धारित शर्तों के आधार पर उन्हें सत्र में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गई है।
क्या हैं प्रमुख शर्तें?
सदन में आने-जाने से पहले विधानसभा सचिव को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा।
उनकी आवाजाही पर निगरानी रहेगी और पूरा कार्यक्रम औपचारिक रूप से दर्ज किया जाएगा।
सत्र के दौरान वे अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा नहीं कर सकेंगे।
किसी भी राजनीतिक या क्षेत्रीय कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
उनकी उपस्थिति केवल विधानसभा परिसर और कार्यवाही तक सीमित रहेगी।
‘नो स्पीच’ की सख्त शर्त
सबसे अहम शर्त यह है कि वे अपने ऊपर चल रहे मामले को लेकर कोई बयान या टिप्पणी नहीं करेंगे। बजट या अन्य सामान्य विषयों पर चर्चा में वे भाग ले सकते हैं, लेकिन अपने केस से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सदन में भी इस विषय पर चर्चा नहीं की जाएगी।
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