प्रदेश में प्रस्तुत वर्ष 2026 का बजट विकास की ऐसी रूपरेखा पेश करता है जिसमें कृषि, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, खेल और नारी सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा की टीम ने एक ऐसा समावेशी बजट रखा है जिसे किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आशा का आधार माना जा रहा है।
कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देने वाली व्यापक घोषणा
बजट में सबसे अधिक ध्यान कृषि पर केंद्रित है। किसानों के लिए एक लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने का प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति की एक नई दिशा तय करेगा। किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से किसान परिवारों को प्रतिवर्ष बारह हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित करने का प्रयास है। भावांतर योजना की सफलता को देखते हुए किसानों को फसल विक्रय में होने वाले नुकसान से सुरक्षा के अधिक सुदृढ़ उपाय भी तय किए गए हैं।
प्राकृतिक एवं जैविक खेती को नई गति
प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए 21 लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को पंजीकृत किया जा चुका है, जो रासायनिक कृषि से हटकर सतत खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है। साथ ही एक लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त बनाएगा। दाल उत्पादन में प्रथम और गेहूं-तिलहन में देश में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाला प्रदेश इस क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
किसान कल्याण वर्ष और विशेष प्रोत्साहन
वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है, जिसके अंतर्गत किसानों को 337 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान कृषि उत्पादन, तकनीकी उन्नयन और नवाचार को गति देगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करेगा।
जनजातीय क्षेत्रों और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान
प्रदेश के 11,277 जनजातीय बहुल गांवों के विकास के लिए विशेष बजट प्रावधान किए गए हैं। ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचा, पेयजल और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजनाएँ ग्रामीण जनजीवन को समग्र रूप से विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़ रुपये का प्रावधान मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा।
नारी सशक्तिकरण और लाड़ली योजनाओं के लिए सुदृढ़ प्रावधान
सरकार ने महिला सुरक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक सम्मान को बजट की प्राथमिकता बनाते हुए लाड़ली बहना सहित अन्य महिला कल्याण योजनाओं में 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। इन योजनाओं से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि समाज में उनका प्रभाव और सहभागिता भी बढ़ेगी। शिक्षा और खेल के क्षेत्र में की गई घोषणाएँ युवाओं को अधिक अवसर और बेहतर मंच प्रदान करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।