छत्तीसगढ़ की पवित्र भूमि चंद्रखुरी, जिसे भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है, एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। यहां माता कौशल्या धाम में शीघ्र ही 51 फीट ऊंची श्रीराम की दिव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह विशाल प्रतिमा मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक नगर ग्वालियर से विशेष रूप से यहां लाई गई है। छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने इसे महीनों की साधना, समर्पण और बारीक शिल्पकला से तैयार किया है। प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर स्थित सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में किया गया, जहां इसे एक अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर के रूप में गढ़ा गया।
वनवासी स्वरूप में प्रभु श्रीराम की दिव्य झलक
51 फीट ऊंची यह प्रतिमा भगवान श्रीराम के वनवासी स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें वे धनुष-बाण धारण किए मर्यादा, त्याग और संयम की छवि के रूप में दिखाई देंगे। इस प्रतिमा को सेंड मिंट स्टोन से निर्मित किया गया है, जो अपनी मजबूती, दीर्घायु और सौम्य शिल्पीय पहचान के लिए जाना जाता है। प्रतिमा की खासियत यह है कि यह श्रीराम के वनवास काल की उस मर्यादा और तेजस्विता को जीवंत कर देगी, जो भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक आधार में सदियों से स्थित रही है।
वनगमन पथ परियोजना को मिलेगा दिव्य विस्तार
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विकसित की जा रही श्रीराम वनगमन पथ परियोजना के अंतर्गत पहले भी दो भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इनमें शिवरीनारायण मंदिर परिसर तथा सीता रसोई जैसे स्थल अपनी अद्भुत कलात्मकता के कारण पहले से ही आकर्षण का केंद्र हैं। इन्हीं प्रतिमाओं की लोकप्रियता और शिल्प गुणवत्ता को देखते हुए 51 फीट ऊंची यह नयी प्रतिमा भी दीपक विश्वकर्मा को बनाने के लिए सौंपे जाने का निर्णय हुआ। यह परियोजना उस ऐतिहासिक यात्रा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जिसके माध्यम से श्रीराम ने वनगमन के दौरान अनेक पौराणिक स्थलों को स्पर्श किया था।
श्रद्धा और पर्यटन, दोनों को मिलेगा नया आयाम
चंद्रखुरी में पहले से स्थापित श्रीराम प्रतिमा के स्थान पर अब यह नई विराट प्रतिमा लगाई जाएगी। इसके स्थापित होने के बाद यह धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन के स्तर पर भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। श्रीराम के ननिहाल की पवित्रता, माता कौशल्या की स्मृतियां और प्रतिमा की अलौकिक आभा मिलकर इस स्थल को देशभर के भक्तों के लिए प्रमुख तीर्थक्षेत्र बना देंगी। इसके साथ ही यह क्षेत्र सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर और भी अधिक सशक्त उपस्थिति दर्ज करेगा।
आस्था, संस्कृति और विकास की अनोखी धरोहर
51 फीट की यह दिव्य प्रतिमा छत्तीसगढ़ की कला परंपरा, आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम है। इसके स्थापित होने के बाद चंद्रखुरी न केवल धार्मिक रूप से समृद्ध होगा, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास का मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा। यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बनेगी तथा छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक वैभव को नई पहचान प्रदान करेगी।
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