अमेरिका–भारत व्यापार समझौते ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इसे किसानों के हितों के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। इसी संदर्भ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी 24 फरवरी को भोपाल में “किसान चौपाल” आयोजित करेंगे, जहां प्रदेशभर से किसानों के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है। कांग्रेस का कहना है कि इस चौपाल के माध्यम से किसानों की वास्तविक समस्याओं और व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों पर खुलकर चर्चा होगी।
किसानों के बीच पहुंचकर संवाद की कोशिश
किसान चौपाल से पहले कांग्रेस के नेता ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों से संवाद कर रहे हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी किसानों के बीच पहुंचे और उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया। सभा के दौरान एक उल्लेखनीय क्षण तब सामने आया, जब उन्होंने मंच से ही अपने पिता को फोन कर खेती की स्थिति पूछी। जवाब में उनके पिता ने बताया कि आलू की फसल में लागत तक नहीं निकल सकी और बारिश के कारण गेहूं की फसल भी खेतों में गिर गई। यह बातचीत सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो गई और किसान संकट फिर से बहस का केंद्र बन गया।
कांग्रेस का आरोप, किसानों के हितों पर चोट
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अमेरिका–भारत व्यापार समझौता किसानों, युवाओं और व्यापक आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार ने बिना अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का इंतजार किए जल्दबाजी में यह निर्णय लिया। कांग्रेस का कहना है कि इस समझौते से भारतीय कृषि बाज़ार विदेशी उत्पादों के लिए खुल सकता है, जिससे स्थानीय किसानों पर दबाव बढ़ सकता है और उनकी आय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
शुल्क और आयात को लेकर गहराई चिंता
कांग्रेस का दावा है कि समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क में बड़ी रियायत देने का वादा किया है, जबकि भारतीय उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाए जाने की आशंका है। पार्टी का कहना है कि इससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमजोर हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि इस समझौते के चलते आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू बाज़ार असंतुलित होने का खतरा है और किसानों की उपज को उचित मूल्य मिलना और मुश्किल हो जाएगा।
ऊर्जा, डेटा और आर्थिक स्वतंत्रता पर सवाल
विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंकाएं जताई हैं। उनका कहना है कि ऐसे समझौते भारत की आर्थिक स्वतंत्रता, नीतिगत स्वायत्तता और भविष्य की आर्थिक दिशा पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि इस समझौते की शर्तें भारत के दीर्घकालिक आर्थिक हितों के अनुरूप नहीं लगतीं और इसे लेकर सार्वजनिक व संसदीय विमर्श की आवश्यकता थी।
भोपाल की किसान पंचायत से बढ़ी उम्मीदें
राहुल गांधी की किसान चौपाल का उद्देश्य देशभर के किसान संगठनों, युवा वर्ग और कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करना है। कांग्रेस का मानना है कि इस चौपाल से किसान समुदाय की आवाज़ और मजबूती से राष्ट्रीय मंच पर सामने आएगी और व्यापार समझौते से जुड़े संभावित परिणामों पर व्यापक चर्चा होगी।
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