हैदराबाद - अगर आपको क्राइम, मर्डर मिस्ट्री, रहस्य और सस्पेंस से भरपूर फिल्में पसंद हैं, तो साउथ की एक फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। साल 2019 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘कावलुदारी’ अपनी रहस्यमयी कहानी और लगातार बदलते ट्विस्ट के लिए जानी जाती है। करीब 2 घंटे 22 मिनट की यह फिल्म दर्शकों को शुरुआत से अंत तक कहानी से जोड़े रखती है।
क्या है ‘कावलुदारी’ की कहानी?
फिल्म की कहानी बेंगलुरु के एक ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर श्याम के इर्द-गिर्द घूमती है। श्याम अपनी नौकरी से ज्यादा खुश नहीं है और उसके भीतर कुछ अलग करने की महत्वाकांक्षा है। कहानी उस वक्त रोमांचक मोड़ लेती है, जब सड़क चौड़ी करने के काम के दौरान जमीन से मानव कंकाल बरामद होते हैं। मामला साधारण नहीं होता, बल्कि जांच आगे बढ़ने पर इसका संबंध करीब 40 साल पुराने एक अनसुलझे केस से निकलता है। श्याम इस पुराने रहस्य को सुलझाने का फैसला करता है। लेकिन जैसे-जैसे वह जांच में आगे बढ़ता है, नए सुराग सामने आते जाते हैं और मामला पहले से कहीं ज्यादा पेचीदा होता चला जाता है।
पुराने केस की जांच बन जाती है खतरनाक
श्याम को जांच के दौरान ऐसे सुराग मिलते हैं, जो उसे अतीत की उन घटनाओं तक ले जाते हैं जिन्हें लंबे समय से दफन समझा जा रहा था। हर नया सुराग कहानी में एक नई परत खोलता है। फिल्म की खासियत यह है कि दर्शकों को लगातार अंदाजा लगाना पड़ता है कि आखिर इस पुराने मामले के पीछे कौन है और इतने सालों तक सच क्यों छिपा रहा।
ऋषि ने निभाया मुख्य किरदार
फिल्म में ऋषि ने ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर श्याम की भूमिका निभाई है। उनके साथ अनंत नाग, अच्युत कुमार, सुमन रंगनाथ और रोशनी प्रकाश अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। अविनाश, सुलिले कुमार, संपत और सिद्धार्थ मध्यम ने सहायक किरदार निभाए हैं। फिल्म में कलाकारों के अभिनय के साथ-साथ कहानी और वातावरण भी सस्पेंस को मजबूत बनाते हैं।
हेमंत राव ने किया निर्देशन
‘कावलुदारी’ को हेमंत राव ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म को पुनीथ राजकुमार ने प्रस्तुत किया था, जबकि पीआरके प्रोडक्शंस के बैनर तले अश्विनी पुनीथ राजकुमार ने इसका निर्माण किया। निर्देशक ने कहानी को सिर्फ पुलिस जांच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने रहस्य, अपराध और इंसानी रिश्तों को जोड़ते हुए इसे धीरे-धीरे आगे बढ़ाया है।
तमिल और तेलुगु में भी बना रीमेक
फिल्म की लोकप्रियता के बाद इसका तमिल और तेलुगु रूपांतरण भी बनाया गया। तमिल वर्जन का नाम ‘कबाड़ादारी’ रखा गया, जिसमें सिबिराज मुख्य भूमिका में नजर आए। वहीं तेलुगु रीमेक ‘कपाटधारी’ में सुमंत ने मुख्य किरदार निभाया।
क्यों देख सकते हैं फिल्म?
अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जिनमें पुराना अनसुलझा केस, रहस्यमयी सुराग, पुलिस जांच और लगातार बदलते समीकरण हों, तो ‘कावलुदारी’ एक अच्छा विकल्प हो सकती है। फिल्म की कहानी धीरे-धीरे रहस्य खोलती है और दर्शकों को अंत तक यह जानने के लिए उत्सुक रखती है कि आखिर 40 साल पुराने मामले की असली सच्चाई क्या है।
फिल्म: कावलुदारी
रिलीज: 2019
भाषा: कन्नड़
अवधि: लगभग 2 घंटे 22 मिनट
जॉनर: क्राइम थ्रिलर / मर्डर मिस्ट्री
निर्देशक: हेमंत राव