विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। संक्रमण अब नए इलाकों तक फैल चुका है और पड़ोसी देश युगांडा में भी इसके मामले सामने आए हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डीआरसी में इबोला का जोखिम स्तर "बहुत अधिक" है, जबकि युगांडा और सीमा से लगे अन्य देशों के लिए खतरे को "उच्च" श्रेणी में रखा गया है।
515 मामले, 91 लोगों की मौत
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, डीआरसी में अब तक इबोला के 515 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 91 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं युगांडा में 19 संक्रमित मरीज मिले हैं, जहां दो मौतें और एक संभावित मृत्यु की भी सूचना है।
सीमा पार फैल रहा संक्रमण
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि युगांडा में सामने आए सभी मामले डीआरसी में चल रहे प्रकोप से जुड़े हैं। संक्रमित लोगों के सीमा पार आने और उनके संपर्क में आए लोगों तथा स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण फैलने के प्रमाण मिले हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
रोकथाम के लिए शुरू की गई विशेष योजना
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां, डब्ल्यूएचओ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। 5 जून को अफ्रीका सीडीसी और डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से महाद्वीपीय इबोला तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना शुरू की है। इसके तहत 51.8 करोड़ डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि अफ्रीकी देशों को संक्रमण की पहचान, रोकथाम और उपचार में सहायता मिल सके।
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन बना चिंता का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा प्रकोप इबोला के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन (BVD) से जुड़ा है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से फैलता है और संक्रमित जानवरों या इंसानों के रक्त व शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से संक्रमण होता है।
2 से 21 दिन तक हो सकती है ऊष्मायन अवधि
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस वायरस की ऊष्मायन अवधि 2 से 21 दिनों तक हो सकती है। हालांकि संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने से पहले वह दूसरों को संक्रमित नहीं करता।
1976 में पहली बार सामने आया था इबोला
इबोला एक गंभीर और कई बार जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसकी पहचान पहली बार 1976 में तत्कालीन जायर (अब डीआरसी) और सूडान में हुई थी। वर्तमान प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी। हालांकि बुंडिबुग्यो स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम सामान्य माना जाता है, लेकिन यह गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है।