फ्रांस - फ्रांस में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। फ्रांसीसी सांसदों का लक्ष्य है कि यह नया कानून सितंबर में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले लागू हो जाए। इसके लिए संसद में अंतिम सहमति बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। इसी वजह से इस कानून को प्राथमिकता दी जा रही है।

समझौते के लिए सांसदों की अहम बैठक
फ्रांस की संसद की गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने से पहले इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में नेशनल असेंबली के सात सदस्यों और सात सीनेटरों की संयुक्त समिति बैठक कर रही है, ताकि दोनों सदनों के बीच मतभेद दूर किए जा सकें। यदि समिति किसी समझौते पर पहुंचती है, तो इस सप्ताह के अंत तक विधेयक पर अंतिम मतदान कराया जा सकता है।
यूरोपीय संघ के कानून से जुड़ी चुनौती
हालांकि इस विधेयक के सामने एक कानूनी चुनौती भी है। यूरोपीय आयोग ने संकेत दिया है कि बिल का मौजूदा स्वरूप पूरी तरह से यूरोपीय संघ (EU) के कानूनों के अनुरूप नहीं है। अब फ्रांसीसी सरकार और सांसद इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि कानून में ऐसे बदलाव किए जाएं जिससे वह यूरोपीय नियमों के अनुरूप भी रहे और बच्चों की सुरक्षा का उद्देश्य भी पूरा हो सके।

राष्ट्रपति मैक्रों का पूरा समर्थन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस प्रस्ताव के सबसे बड़े समर्थकों में शामिल हैं। माना जा रहा है कि अगले वर्ष कार्यकाल समाप्त होने से पहले यह उनके नेतृत्व में लागू होने वाले प्रमुख सामाजिक सुधारों में से एक हो सकता है। मैक्रों लंबे समय से बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जता चुके हैं और डिजिटल सुरक्षा को अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल कर चुके हैं।
किस बात पर अटका है मामला?
फिलहाल नेशनल असेंबली और सीनेट के बीच सबसे बड़ा मतभेद इस बात को लेकर है कि प्रतिबंध किन प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा। नेशनल असेंबली चाहती है कि 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सभी सोशल मीडिया और ऑनलाइन नेटवर्किंग सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं सीनेट का सुझाव है कि केवल सरकार द्वारा तय की गई ब्लैकलिस्ट में शामिल प्लेटफॉर्म्स पर ही यह रोक लागू की जाए। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच अंतिम सहमति बनाने की कोशिश जारी है।
दुनिया के लिए बन सकता है उदाहरण
यदि यह कानून लागू होता है, तो फ्रांस उन देशों में शामिल हो जाएगा जो बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर आयु-आधारित सख्त नियम लागू कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस का यह कदम भविष्य में अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, जहां बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
