मिडिल-ईस्ट में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यूएई ने अप्रैल महीने में ईरान के भीतर स्थित रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए थे। रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई और सार्वजनिक रूप से इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। इस दावे के सामने आने के बाद क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक कूटनीति में नई बहस शुरू हो गई है, क्योंकि अब तक इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल की भूमिका प्रमुख मानी जा रही थी।
ईरान के लावान द्वीप की रिफाइनरी बनी कथित निशाना
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर हमला किया गया था। यह वही समय था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप संघर्ष विराम की घोषणा कर रहे थे और पांच सप्ताह तक चले हवाई अभियान के बाद हालात शांत होने की उम्मीद जताई जा रही थी। लावान रिफाइनरी ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में गिनी जाती है और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से उसकी रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी मानी जाती है। ऊर्जा सूचना एजेंसी के पुराने आंकड़ों के अनुसार यह रिफाइनरी प्रतिदिन लगभग 60 हजार बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने में सक्षम थी।
अमेरिका ने कथित तौर पर यूएई की भूमिका का किया समर्थन
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका ने यूएई की इस सैन्य सक्रियता का विरोध नहीं किया, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों द्वारा संभावित सहयोग को भी सकारात्मक रूप में देखा। सूत्रों के मुताबिक वॉशिंगटन का मानना था कि संघर्ष विराम उस समय तक पूरी तरह प्रभावी नहीं हुआ था, इसलिए सैन्य कार्रवाई को लेकर उसने कोई आपत्ति नहीं जताई। इस खुलासे ने यह संकेत भी दिया है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देश अब पहले की तुलना में अधिक प्रत्यक्ष भूमिका निभाने लगे हैं, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अधिक जटिल हो सकता है।
ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से दिया जवाब
ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार लावान द्वीप पर हमले के कुछ ही घंटों बाद यूएई और कुवैत की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ईरान ने दावा किया कि उसके ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर “कायरतापूर्ण हमला” किया गया था। दूसरी ओर यूएई ने कहा कि उस पर 17 मिसाइलों और 35 ड्रोन के जरिए हमला करने की कोशिश की गई। हालांकि अमीरात ने ईरान के भीतर किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की है, लेकिन उसने यह जरूर कहा कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है।
आधुनिक सैन्य ताकत और बढ़ती रणनीतिक सक्रियता
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यूएई के पास क्षेत्र की सबसे आधुनिक वायु सेनाओं में से एक मौजूद है। उसके बेड़े में फ्रांसीसी मिराज लड़ाकू विमान, अत्याधुनिक एफ-16 जेट, निगरानी विमान और उन्नत ड्रोन प्रणाली शामिल हैं। युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान के ऊपर अज्ञात लड़ाकू विमानों की गतिविधियां देखे जाने के बाद ही यूएई की संभावित संलिप्तता को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूएई ने संयुक्त राष्ट्र में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर ऐसे प्रस्तावों का समर्थन किया, जिनमें आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की अनुमति देने की बात शामिल थी।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव और गहराने के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं तो इससे पश्चिम एशिया का सामरिक परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है। अब तक परोक्ष रूप से सक्रिय रहने वाले खाड़ी देशों का प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक बना सकता है। साथ ही ईरान और अरब देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास भी और गहरा होने की आशंका जताई जा रही है। दुबई में ईरान से जुड़े स्कूलों, क्लबों और यात्रा सुविधाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को भी इसी बढ़ते तनाव का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक हलचलों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।