इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा 'काफिर' कहे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वे उन्हें काफिर मानते हैं, तो फिर उनकी सरकार द्वारा बनाई गई सड़कों पर न चलें और सरकारी योजनाओं का लाभ भी न लें। मंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश में विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर सरकार लगातार सक्रिय दिखाई दे रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
'हम काफिर हैं तो हमारी सड़क पर मत चलो'
इंदौर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिस क्षेत्र में सड़कें बनाई जा रही हैं, वहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम भाई उन्हें 'काफिर' कहते हैं। उन्होंने कहा, "अगर हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो। आपके घर में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा आ रहा है तो उसे भी मत लो।"
'सबका साथ, सबका विकास हमारी नीति'
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि उनकी सरकार और पार्टी ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" उनकी कार्यशैली का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि जनता उन्हें वोट दे या न दे, लेकिन विकास कार्य और जनसेवा रुकने वाली नहीं है।
वोट मिले या नहीं, काम करते रहेंगे
कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की सेवा करना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि अगर जनता समर्थन देगी तो और अधिक उत्साह से काम करेंगे, लेकिन समर्थन नहीं मिलने पर भी विकास कार्य जारी रहेंगे। उनका उद्देश्य केवल जनसेवा है।
दो दिवसीय विकास कार्यक्रम में शामिल हुए थे मंत्री
जानकारी के अनुसार, कैलाश विजयवर्गीय रविवार को विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने वार्ड क्रमांक-1 और वार्ड क्रमांक-5 में करीब 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए की लागत से होने वाले 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया और क्षेत्रवासियों को इन परियोजनाओं की सौगात दी।
भाजपा कार्यकर्ता होना मेरा सौभाग्य- विजयवर्गीय
कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता होना उनके जीवन का पहला सौभाग्य है, जबकि दूसरा सौभाग्य जनता का प्रतिनिधित्व कर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों की समस्याओं का समाधान करना और विकास कार्यों को गति देना उनकी प्राथमिकता है।
एक नजर में पूरा मामला