मध्यप्रदेश के सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी और निर्धारित समय तक कार्यालय में मौजूद नहीं रहने वाले कर्मचारियों पर अब सख्ती की तैयारी है। प्रशासनिक अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर सरकार लगातार निर्देश देती रही है।इसके बावजूद कर्मचारियों के समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने और हाजिरी लगाने के बाद निजी काम से बाहर चले जाने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी व्यवस्था में बदलाव के लिए सरकार अब डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मैनुअल रजिस्टर की जगह लगेगा बायोमेट्रिक सिस्टम
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को मैनुअल रजिस्टर में हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था से राहत मिलेगी। इसके स्थान पर बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लगाया जाएगा।इस सिस्टम में कर्मचारी की एंट्री और एग्जिट का समय रिकॉर्ड होगा। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि कर्मचारी किस समय कार्यालय पहुंचा और कब कार्यालय से बाहर गया।
सचिवालय से होगी शुरुआत
जानकारी के मुताबिक बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था को लागू करने की शुरुआत राजधानी भोपाल से की जाएगी।सबसे पहले राज्य सचिवालय (मंत्रालय), सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन में इसे लागू करने की तैयारी है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के दूसरे सरकारी कार्यालयों में भी इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।यानी शुरुआत राजधानी के प्रमुख सरकारी कार्यालयों से होगी और आगे इसका दायरा पूरे प्रदेश तक बढ़ाया जा सकता है।
रजिस्टर में साइन के बाद गायब होने की शिकायतें
मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारी विभाग में रखे हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर करके अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह है कि केवल हस्ताक्षर से कर्मचारी के पूरे कार्य समय में कार्यालय में मौजूद रहने की पुष्टि नहीं हो पाती।कई बार सुबह कार्यालय पहुंचकर हाजिरी दर्ज करने के बाद कर्मचारी निजी काम से बाहर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनके आने और जाने का वास्तविक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता।बायोमेट्रिक व्यवस्था में एंट्री और एग्जिट दोनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे उपस्थिति की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
2021 से लागू है पांच दिवसीय कार्य सप्ताह
जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 से सरकारी कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। इसके तहत शनिवार और रविवार को अवकाश रहता है।इसके अलावा विभिन्न प्रकार के अवकाश भी कर्मचारियों को मिलते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक साल में 104 दिन शनिवार-रविवार के अवकाश होते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग छुट्टियों को जोड़ने पर कुल अवकाश की संख्या काफी अधिक हो जाती है।ऐसे में सरकार का जोर इस बात पर है कि निर्धारित कार्य दिवसों में कर्मचारी कार्यालय समय का पालन करें और अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें।
सुबह 10 से शाम 6 बजे तक समय की पाबंदी पर जोर
सरकारी कार्यालयों में निर्धारित कार्य समय का पालन भी नई व्यवस्था के केंद्र में है। कर्मचारियों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय समय का उल्लेख किया गया है।सरकार की कोशिश है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचें और निर्धारित समय तक अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहें। बायोमेट्रिक सिस्टम से उपस्थिति की निगरानी में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
कई बार जारी हो चुके हैं निर्देश
सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों में अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर इस साल कई बार निर्देश जारी किए गए हैं। जानकारी के अनुसार जनवरी, मई और अगस्त में इस संबंध में निर्देश दिए गए।15 मई को सचिवालय स्तर के कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित बायोमेट्रिक व्यवस्था की समीक्षा भी की गई थी। इसके बाद 25 अगस्त को सरकार ने प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में स्पष्टता दी।अब अधिकारी इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया और उसकी रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
डिजिटल अटेंडेंस से बढ़ेगी जवाबदेही
बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होने के बाद कर्मचारियों की उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे प्रशासन के पास यह जानकारी रहेगी कि कर्मचारी कार्यालय कब आया और कब बाहर गया।सरकार की कोशिश है कि नई व्यवस्था से कर्मचारियों में समय की पाबंदी और जवाबदेही बढ़े। आने वाले समय में प्रदेश के अन्य सरकारी कार्यालयों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की तैयारी है।